संतकबीरनगर। जिले में आलू की खेती के लिए जंगली सूअर आफत बन रहे हैं। किसानों ने अब इससे दूरी बनानी शुरू कर दी है। पहले आलू की खेती ढाई हजार हेक्टेयर में खेती होती थी, वहीं अब केवल दो हजार हेक्टेयर में हो रही है। आलू को स्टोर करने के लिए जिले में केवल दो ही कोल्ड स्टोरेज हैं। हालांकि विभाग का कहना है कि ज्यादातर लोग आलू को खेत से ही खरीद ले रहे हैं।
जनपद में नाथनगर, खलीलाबाद, बघौली, मेंहदावल, हरिहरपुर, सांथा, बेलहर में आलू की पैदावार बेहतर होती है। क्योंकि यहां की जमीन ऊंची सतह पर है, यहां पानी नहीं लगता है। जमीन भी उपजाऊ है। किसान रामहरख, अर्जुन का कहना है कि आलू की खेती से पहले काफी लाभ होता था। व्यापारी खेत से ही आलू खरीद लेते थे, लेकिन जंगली सुअर व अन्य जानवर काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। रात में रतजगा भी नहीं कर सकते हैं। इस वजह से अब खेती कम होती गई। पहले जिले में ढाई हजार हेक्टेयर में आलू की खेती होती थी, लेकिन अब यह रकबा दो हजार हेक्टेयर तक सीमित हो गया है। साथ ही जिले में आलू के भंडारण के लिए मात्र दो ही कोल्ड स्टोरेज भी हैं।