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Sant Kabir Nagar News: जब जीव अपने बल और बुद्धि का अहंकार त्याग कर पूर्ण शरणागति के साथ परमात्मा को पुकारता है

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धनघटा। क्षेत्र के ग्राम कटार मिश्र में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के आठवें दिन भक्ति और श्रद्धा की त्रिवेणी बही। अयोध्या धाम से आए कथा व्यास सभामणि शास्त्री जी ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी के विवाह का अत्यंत मार्मिक और जीवंत वर्णन किया। कथा के दौरान पूरा पांडाल 'जय श्री कृष्ण' और 'बांके बिहारी लाल की जय' के जयकारों से गुंजायमान रहा।
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कथा व्यास ने गजेंद्र मोक्ष के प्रसंग की व्याख्या करते हुए श्रद्धालुओं को जीवन का गूढ़ रहस्य समझाया। उन्होंने कहाकि जब जीव अपने बल और बुद्धि का अहंकार त्याग कर पूर्ण शरणागति के साथ परमात्मा को पुकारता है, तो भगवान नंगे पांव उसकी रक्षा के लिए दौड़े चले आते हैं। उन्होंने समुद्र मंथन के माध्यम से बताया कि जिस प्रकार अमृत प्राप्ति के लिए धैर्य और मंथन आवश्यक है, उसी प्रकार जीवन में सुख-शांति के लिए विकारों का त्याग अनिवार्य है। कथा के मुख्य प्रसंग 'रुक्मणी विवाह' का वर्णन करते हुए शास्त्री ने बताया कि विदर्भ की राजकुमारी रुक्मणी ने मन ही मन भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति स्वीकार कर लिया था। जब उनके भाई रुक्मणी ने अधर्मी शिशुपाल के साथ उनका विवाह तय किया, तो रुक्मणी ने एक ब्राह्मण के माध्यम से द्वारकाधीश को प्रेम संदेश भेजा। भक्त की पुकार सुनकर भगवान श्रीकृष्ण स्वयं कुंदनपुर पहुंचे और रुक्मणी का वरण किया। इस प्रसंग के दौरान झांकियों के माध्यम से रुक्मणी विवाह का दृश्य देख श्रद्धालु झूम उठे और पुष्प वर्षा की। कथा के दौरान प्रसिद्ध नारायण मिश्र, चंद्र प्रकाश पांडेय, महेंद्र प्रताप मिश्र, अनिल मिश्र, संगम मिश्र, अभिनव प्रताप मिश्र, राघवेंद्र पांडेय, अंकुर उपाध्याय, राजन मिश्र, गिरीश मिश्र, राघवेंद्र विक्रम मिश्र, यादवेंद्र विक्रम मिश्र आदि मौजूद रहे।
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