सरकारी गेहूं खरीद में जालसाजी उजागर हुआ है। धनघटा क्षेत्र के सेमरी खास गांव निवासी भूमिहीन शख्स के नाम पर 12,79 634 रुपये का गेहूं बेच दिया गया। पीड़ित को इस बात की जानकारी तब हुई, जब उसका अंत्योदय राशन कार्ड निरस्त कर दिया गया। अंत्योदय कार्ड ठीक करने और उसके नाम से फर्जीवाड़ा करके रकम निकालने वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पीड़ित अफसरों के दरवाजे का चक्कर काट रहा है। इधर, इसकी जानकारी होने पर जिम्मेदारों के हाथपांव फूल गए।
सेमरी खास गांव निवासी लोरिक पुत्र रामपति ने बताया कि उसका अंतोदय कार्ड बना हुआ है। वह लंबे समय से अंत्योदय कार्ड के सहारे अनाज लेकर पविार का पेट पालता है। उसका अंत्योदय कार्ड जून 2022 में निरस्त हो गया। जिसे ठीक कराने के लिए 16 जुलाई को वह तहसील पहुंचा, जहां पर पूर्ति निरीक्षक ने रिपोर्ट दी कि वह बड़ा कास्तकार है, उसके नाम से करीब 13 लाख रुपये का गेहूं बिका है। जिस कारण उसका अंत्योदय कार्ड निरस्त किया गया है।
पीड़ित ने एसडीएम को प्रार्थना पत्र देकर कहा कि भूमिहीन के साथ-साथ वाह अत्यंत गरीब है। उसके गांव के रहने वाले एक शख्स खाद्यान्न और खाद का व्यवसाय करते हैं। चपरा पूर्वी में धान, गेहूं क्रय केंद्र भी संचालित करते हैं। पीड़ित का आरोप है कि वही व्यापारी उनके नाम से फर्जी खतौनी तैयार कराकर तहसील से सत्यापित कराया और उसके बाद उसके नाम से करीब 13 लाख का गेहूं बेच दिया।
दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई और अंत्योदय कार्ड बहाल किए जाने की मांग को लेकर पीड़ित ने पिछले संपूर्ण समाधान दिवस में भी जाकर प्रार्थना पत्र दिया। पीड़ित और उसके अधिवक्ता तहसील बार एसोसिएशन धनघटा के अध्यक्ष लाल शरण सिंह का कहना है कि जिस व्यापारी ने फर्जीवाड़ा करके इस भूमिहीन व्यक्ति के नाम से फर्जीवाड़ा किया है। यदि सही से जांच और धनघटा तहसील क्षेत्र में संचालित होने वाले अन्य क्रय केंद्रों की जांच की जाए तो इस तरह के तमाम मामले प्रकाश में आएंगे। पीड़ित ने कहा कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो वह जल्द ही मुख्यमंत्री से जाकर न्याय की फरियाद करेगा।
भूमिहीन के नाम से गेहूं बेचने का मामला सामने आया है। उसका अंत्योदय कार्ड निरस्त हुआ है। इस पूरे प्रकरण की जांच डिप्टी आरएमओ को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट में यदि शिकायत सहीं मिली तो संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार कारर्रवाई की जाएगी।
- मनोज कुमार सिंह, एडीएम