जिला अस्पताल में बच्चे का इलाज करते चिकित्सक-संवाद
संतकबीरनगर। पछुआ हवाओं ने ठंड के साथ गलन बढ़ा दी है। जैसे-जैसे पारा गिर रहा है, बच्चे व बुजुर्ग सर्दी-खांसी, सांस लेने की परेशानी की चपेट में आने लगे हैं। ठंड के मौसम में कोल्ड डायरिया सबसे ज्यादा खतरनाक है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि बच्चे की सांस तेज चल रही हो, सांस लेने में घरघराहट, शरीर शिथिल पड़ने लगे तो ये निमोनिया के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत बच्चे को चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए।
जिला अस्पताल में मंगलवार को ओपीडी में 1320 मरीज पहुंचे। बाल रोग की ओपीडी में 200 बच्चे पहुंचे। चिकित्सकों ने बताया कि इमरजेंसी व ओपीडी में 40 फीसदी मरीज सांस की परेशानी से संबंधित रहे। सबसे ज्यादा मरीज वायरल, सांस फूलने, जोड़ों में दर्द के थे। दो दिन से बढ़ी ठंड के कारण वायरल संक्रमण के साथ बुजुर्गों में सांस फूलने की समस्या बढ़ी है। जुकाम के बाद सीने में कफ जमने से सांस लेने में परेशानी हो रही है।
फिजिशियन डॉक्टर एसडी ओझा ने बताया कि ठंड को देखते हुए गंभीर व अस्थमा मरीजों को सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि अस्थमा मरीज पास में हमेशा गुनगुना पानी का सेवन करें, सुबह शाम गर्म कपड़े पहनें और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ का सेवन करना लाभदायक है। बुखार के साथ उल्टी और दस्त का सामना करना पड़ रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर डीपी सिंह ने बताया कि कोल्ड डायरिया से बचाने के लिए बच्चों को गीले बिस्तरों से बचाएं, दूध गुनगुना करके ही दें, उबला हुआ पानी पिलाएं, अच्छी तरह गर्म कपड़े पहनाकर रखें।