- खतरे के निशान से 20 सेमी नीचे बह रही सरयू
- लखीमपुर के शारदा बैराज से छोड़ा गया पानी
- एमबीडी बांध और नदी के बीच की फसलें जलमग्न
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। शनिवार की सुबह से रविवार शाम तक घाघरा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। 36 घंटे में एक मीटर से अधिक बढ़े पानी के कारण एमबीडी बांध और नदी के मध्य बसे 34 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नदी का जलस्तर रविवार की शाम बिड़हर घाट पर 79.200 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 79.400 मीटर से महज 20 सेंटीमीटर नीचे है।
बाढ़ खंड द्वितीय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि लखीमपुर के शारदा बैराज से सरयू नदी में पानी छोड़ा गया है, जिसका असर यहां पर भी देखने को मिल रहा है। रविवार की शाम तक नदी का पानी फसलों को जलमग्न कर दिया है। साथ ही एमबीडी बांध के करीब पहुंच गई है। दूसरी तरफ क्षेत्र के पूर्वी इलाके में गायघाट दक्षिणी गांव से ढोल बजा जाने वाली सड़क पर बनी पुलिया को क्षतिग्रस्त कर दिया।
गायघाट दक्षिणी के प्रधान बालेंद्र उर्फ पप्पू, लाल बिहारी, ईशदत, राघव, राजाराम, अनिल, कुमार आदि का कहना है कि दो दिनों में नदी का जलस्तर जितना तेजी के साथ बढ़ा है, अगर इसी तरह कल शाम तक बढ़ोतरी हुई तो गायघाट दक्षिणी, ढोल बजा, गुनवतिया, चकदहा, दौलतपुर, सियाराम अधीन, सियर कला, दौलतपुर, आगापुर गुलरिहा, पटौवा, मदरहा, नारायनपुर, कंचनपुर चपरा पूर्वी आदि गांव में बाढ़ का पानी घुस जाएगा। घर से पलायन करना लोगों की मजबूरी हो जाएगी।
गांववालों का कहना है कि दो दिनों में नदी का पानी गांव के करीब पहुंचा। लेकिन अभी तक लेखपाल को छोड़कर कोई भी तहसील का अधिकारी यहां पर नहीं आया। अचानक लोगों के घरों में बाढ़ का पानी घुसने लगेगा तो किस तरह लोग अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे। इसका इंतजाम नहीं किया जा रहा है।
चौथी बार बढ़ा सरयू का जलस्तर
इस वर्ष चौथी बार नदी का पानी बढ़ा है और गांव पर बाढ़ का संकट मंडराने लगा है। फसलें बाढ़ के कारण नष्ट हो गई उसका मुआवजा मिलेगा कि नहीं इसका भी कोई भरोसा नहीं है। एसडीएम रमेश चंद का कहना है कि नदी के बढ़ते जलस्तर को देखकर राजस्व विभाग की टीम गांव-गांव पहुंच स्थिति की जायजा ले रही हैं। जहां जिस तरह की जरुरत पड़ेगी, वहां पर उस तरह की मदद की जाएगी।