संतकबीरनगर। न्यायिक तहसीलदार ने दो दिन में 130 मुकदमों का निस्तारण करने का मामला फिर गरम हो गया है। इसकी जांच डीडीसी गोरखपुर को मिली है। लेकिन चार्जशीट न आने की वजह से जांच में देरी हो रही थी। इधर, डीडीसी ने चार्जशीट के लिए चकबंदी आयुक्त कार्यालय को पत्र भेजा है।
जैसे ही चार्जशीट आएगी जांच में तेजी आ जाएगी। डीडीसी के मुताबिक चार्जशीट का इंतजार किया जा रहा है जिससे यह मालूम हो सके कि न्यायिक तहसीलदार पर क्या-क्या आरोप लगे हैं।
बता दें कि खलीलाबाद तहसील में कार्यरत रहे चकबंदी अधिकारी चंद्रिका प्रसाद शुक्ल को न्यायिक तहसीलदार की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने सितंबर 2023 में कार्यभार ग्रहण किया और दो दिन में बिना पत्रावली के परीक्षण किए राजस्व संहिता के 130 मुकदमे में फैसला दे दिया। उसके बाद उन्होंने अपना स्थानांतरण बहराईच करा लिया। जहां पर वह चकबंदी अधिकारी के पद पर कार्य रहे थे। एक शिकायतकर्ता ने न्यायिक तहसीलदार के फैसले पर आपत्ति की और उसकी शिकायत डीएम से की। जिसके बाद डीएम ने एडीएम से जांच कराई थी।
एडीएम की जांच में यह पाया गया कि शिकायत कर्ता के मामले में न्यायिक तहसीलदार ने बिना पत्रावली का परीक्षण किए ही फैसला दे दिया है। इसके बाद डीएम ने दिसंबर 2024 में चकबंदी आयुक्त को पत्र लिखकर चकबंदी अधिकारी चंद्रिका प्रसाद शुक्ल की निगरानी करते हुए कार्रवाई की सिफारिश की थी। चकबंदी आयुक्त भानुचंद गोस्वामी ने डीएम को पत्र भेजकर कहा है कि वर्तमान में चंद्रिका प्रसाद शुक्ल चकबंदी अधिकारी सुल्तापुर में तैनात हैं। उनके खिलाफ विभागीय जांच उप संचालक चकबंदी गोरखपुर को दी गई है। इधर विभागीय जांच शुरू होने की सूचना मिलते पर तहसीलदार न्यायिक कार्यालय में हड़कंप मचा हुआ है।