महाराष्ट्र के नासिक से होती है फर्जी स्टांप की जांच
स्थानीय स्तर पर फर्जी स्टांप की जांच की नहीं है सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जमीन बैनामा के लिए लगने वाले स्टांप ट्रेजरी व ई-स्टांप की कारगर साबित हो रहा है। फर्जी स्टांप की जांच के लिए तत्काल स्थानीय स्तर पर कोई सुविधा नहीं है। महाराष्ट्र के नासिक में फर्जी स्टांप के जांच की सुविधा है। जहां से रिपोर्ट आने में काफी लंबा समय लग जाता है।
फर्जी स्टांप बेचने का गिरोह कई जनपदों में बड़े पैमाने पर आपना नेटवर्क बना चुका है। जो स्टांप वेंडरों के साथ मिलकर फर्जी स्टांप खपाकरजेब भर रहे हैं। रजिस्ट्री ऑफिस से जुड़े जानकारों के मुताबिक फर्जी स्टांप की पहचान काफी मुश्किल काम है। स्टांप सामने आने और शक होने के बाद उसे जांच के लिए महाराष्ट्र के नासिक भेजना पड़ता है। जहां पर जांच के बाद ही स्टांप के सही अथवा फर्जी होने की जानकारी मिल पाती है। ऐसे में जमीन खरीदने के इच्छुक व्यक्तियों को स्टांप वेंडर से स्टांप न लेकर ट्रेजरी से स्टांप लेना ज्यादा सही होता है।
इसके अलावा वर्तमान में ई-स्टांप लेना ज्यादा सही होता है। ई-स्टांप में फर्जीवाड़ा की संभावना काफी कम होता है। जिसकी जांच तत्काल ऑनलाइन कार्यालय में ही कर लिया जाता है। सबसे ज्यादा जमीन बैनामे में ही स्टांप प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा तहसील और कचहरी में भी स्टांप की बिक्री होती है। सिर्फ जमीन रजिस्ट्री में ही एक दिन में जिले में लगभग 30 लाख रुपये स्टांप बिक्री का लक्ष्य है। बाकी तहसील और कचहरी में छोटे-छोटे स्टांप की भी बिक्री होती है। ऐसे में स्टांप फर्जीवाड़ा पकड़ में आने के बाद लोगों की सांसें अटकी हुई हैं।
जमीन बैनामा कराने के इच्छुक व्यक्ति अगर को किसी तरह के स्टांप में शक होता है तो वह ट्रेजरी अथवा ई-स्टांप का प्रयोग करें। इससे स्टांप फर्जीवाड़ा से बचाव होगा। स्थानीय स्तर पर स्टांप जांच की कोई सुविधा नहीं है। महाराष्ट्र के नासिक में स्टांप जांच की सुविधा है।
- राजेश कुमार गुप्ता, रजिस्ट्रार उप निबंधक कार्यालय