पशु क्रूरता अधिनियम का पालन कराने को लेकर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में डीएम रमाकांत पांडेय की अध्यक्षता में अधिकारियों की बैठक हुई। इसमेें तय हुआ कि पशु क्रूरता अधिनियम का पालन न करने वालों पर एफआईआर दर्ज सख्त कार्रवाई की जाए।
डीएम ने कहा कि जनपद में 18 पशु चिकित्सालय तथा 19 पशु सेवा केंद्र है। इन पर प्रशिक्षित डॉक्टरों की तैनाती की गई है। जनपद के पशुपालक इन केंद्रों पर ही पशुओं की दवा कराएं। अप्रशिक्षित डॉक्टरों से पशुओं का इलाज कराना भी पशु क्रूरता अधिनियम में आता है। डीएम ने पशु क्रूरता अधिनियम में आने वाले अन्य विंदुओं को बताते हुए कहा कि ऑक्सीटोशिन इंजेक्शन का प्रयोग भी प्रतिबंधित है।
पशुओं मारना पीटना, एक सीमा से अधिक भार लादना, पशुओं को एक जगह से दूसरे जगह ले जाते समय न्यूनतम जगह होनी चाहिए।
थोड़ी-थोड़ी देर बाद जानवरों को ले जाते समय बैठने का अवसर देना चाहिए, मेलों में आयोजित सर्कस में क्रूरता पूर्वक व्यवहार करना, बछड़ों को दूध न पिलाना, एक जानवर कट रहा है तो उसे दूसरा जानवर देखना नही चाहिए, इत्यादि ऐसे नियम है। जिन्हें पशु क्रूरता अधिनियम के अंतर्गत माना गया है।
जनपद में उनकी अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। जिसमें उपाध्यक्ष पुलिस अधीक्षक, सचिव मुख्य चिकित्साधिकारी, प्रभागाीय वन अधिकारी, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत और अधिशासी अधिकारी हैं। एसपी हीरालाल ने कहा कि जनपद में पशुओं के अवैध व्यापार के लिए बखिरा, दुधारा, तथा आंशिक रूप से धनघटा व मेंहदावल में भी अवैध व्यापार होता है।
इसके लिए जनपद की पुलिस को सतर्क कर दिया गया है कि अवैध रूप से पशुओं के हो रहे कटान के पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कराया जाए। जो वैध रूप से लाइसेंस के साथ पशुओं के मांस का व्यापार कर रहे हैं। उनके उपर यह नियम लागू नहीं होगा। बैठक में सीएमओ डॉक्टर आनंद प्रकाश श्रीवास्तव, सीडीओ लाल जी यादव, सीवीओ डॉक्टर टीपी मिश्र, एसडीएम कृतिका ज्योत्सना, राहुल पांडेय, उमेश चंद्र निगम, अपर जिला सूचना अधिकारी लाल जी शुक्ल, ईओ उमाकांत मिश्र, डीआईओएस शिव कुमार ओझा आदि मौजूद रहे।