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जांच में जीवित को बताया मृत 

Sat, 06 Aug 2016 11:48 PM IST
sant kabir nagar 
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शनिवार को पेंशन बंद होने की शिकायत लेकर समाजकल्याण विभाग के दफ्तर पहुंचे इमामुद्दीन। - फोटो : अमर उजाला
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साहब! मैं जिंदा हूं...। मुझे मृत दिखाकर मेरी पेंशन बंद कर दी गई। श्रीमान मेरी पेंशन शुरू कराएं। मंगलवार को तहसील दिवस से शुरू हुईं ऐसी शिकायतों की संख्या जिले में अब तक पांच हो गई है। इसमें से एक मामला शनिवार का है। हालांकि इनमें से एक शिकायत की जांच समाज कल्याण विभाग द्वारा कराने पर पता चला कि महिला अपात्र है। इस कारण पेंशन रोकी गई।
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खलीलाबाद ब्लॉक के बडगो ग्राम पंचायत के अंसारी टोला निवासी इमामुद्दीन(65) पुत्र मोहम्मद शमी शनिवार को समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने बताया कि वह जीवित है और उन्हें कागजी रिपोर्ट में मृत दिखाकर मिलने वाला वृद्धा पेंशन बंद कर दी गई है। चार भाइयों के बीच में सिर्फ एक बीघा जमीन है। इकलौते बेटे की मजदूरी के सहारे घर का चूल्हा जलता है। उन्हें सात-आठ सालों से पेंशन मिल रही थी। अब बंद हो जाने से आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने जिला समाज कल्याण अधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर दुबारा पेंशन जारी कराए जाने की मांग की। 

इससे पहले मंगलवार को खलीलाबाद तहसील दिवस में मृत दिखा पेंशन बंद किए जाने की शिकायत डीएम से सेमरियावां ब्लॉक क्षेत्र के चंगेरा- मंगरा गांव निवासी रामलगन ने की थी। इसी दिन रामरति पत्नी रामनरेश, निवासी बडगो ने भी मृत दिखाकर पेंशन बंद करने की शिकायत की थी। इसके बाद बुधवार को बेलहर ब्लॉक क्षेत्र के पवरिहा गांव की रहने वाली अवतारी देवी पत्नी रामप्यारे और शुक्रवार को खलीलाबाद के बयारा गांव के रहने वाले कालिका प्रसाद पुत्र मोहम्मद शमी ने भी मृत दिखाकर पेंशन बंद किए जाने की शिकायत डीएम     से की। 
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जिला समाज कल्याण अधिकारी उमाकांत शुक्ल ने बताया कि अब तक पांच मामले ऐसे सामने आए हैं। जिसमें अवतारी देवी पत्नी रामप्यारे की शिकायत की जांच करने एसडीएम प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी कार्यालय में आए थे। जांच में पता चला कि पोर्टल पर अवतारी देवी को मृत नहीं दर्शाया गया है, बल्कि अपात्र अंकित है। जिसकी वजह से उनका पेंशन बंद कर दी गई है। समाज कल्याण विभाग की जांच में पता चला कि अवतारी देवी के तीन कमाऊ पुत्र हैं। जांच में अपात्र होने की वजह से उनकी पेंशन रोकी गई है। जबकि शिकायतकर्ता इमामुद्दीन, कालिका प्रसाद और रामगलन के मामले में सत्यापनकर्ता लेखपाल और सेक्रेट्री को पत्र भेजकर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है कि यह लोग जीवित है और उन्हें कैसे सत्यापन रिपोर्ट में मृत घोषित कर दिया गया। जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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