संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। मधुमेह की बीमारी आम होती जा रही है। इसके प्रति लापरवाही शरीर के सभी अंगों को प्रभावित कर सकती है। योग संग चिकित्सकों की सलाह पर एहतियात बरतकर काफी हद तक इससे खुद काे बचाया जा सकता है। यह ऐसी बीमारी है, जो जिंदगी के आखिरी पड़ाव तक शरीर का साथ नहीं छोड़ती है।
सीएचसी सेमरियावां के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. जावेद अख्तर ने कहा कि डायबिटीज प्राकृतिक या आनुवांशिक कारणों से होती है। डायबिटीज होने के दो मुख्य कारण होते हैं। पहला शरीर में इन्सुलिन का बनना बंद हो जाना तथा दूसरा शरीर में इन्सुलिन का प्रभाव कम हो जाना है। दोनों ही परिस्थितियों में शरीर में ग्ल्यूकोज की मात्रा बढ़ जाती है।
उनका कहना है कि जैसे-जैसे रोग की प्रगति होती है, इंसुलिन की कमी भी विकसित हो सकती है। इस फॉर्म को पहले गैर इंसुलिन-आश्रित मधुमेह मेलेटस या वयस्क शुरुआत मधुमेह के रूप में जाना जाता था। इसका सबसे आम कारण अत्यधिक शरीर का वजन होना और पर्याप्त व्यायाम न करना है। बताया कि डायबिटीज मेलेटस जिसे सामान्यता मधुमेह कहा जाता है।
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मधुमेह से दुष्परिणाम
- डायबिटीज शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करता है।
- लंबे समय तक डायबिटीज बने रहने पर आंखों की रोशनी कम हो जाती है।
- किडनी खराब हो सकती है तथा दिल की बीमारी हो सकती है।
- मांसपेशियां कमजोर होती हैं तथा धीरे-धीरे अवसाद आने लगता है
- मोतियाबिंद की भी संभावना बन जाती है
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मधुमेह के लक्षण
- अत्यधिक भूख व प्यास रखना
- शरीर में कमजोरी बना रहना
-हाथों-पैरों में झुनझुनाहट होना
- अत्यधिक थकान महसूस होना
- बार-बार पेशाब जाना, त्वचा रोग, सिरदर्द
- घाव ठीक न होना या देर से घाव ठीक होना
- चिड़चिड़ापन व अनायास वजन कम होना