संतकबीरनगर। बरगदवा खुर्द गांव के सूर्यकांत मिश्र हत्याकांड मामले में पिता के आत्मदाह की चेतावनी को लेकर कलक्ट्रेट में ढाई घंटे तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। तकरीबन ढाई घंटे के हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद डीएम ने परिजनों को पांच जनवरी तक हत्यारों को पकड़ने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन मानें और प्रशासन ने राहत की सांस ली।
बेलहर कला थाना क्षेत्र के बरगदवां खुर्द के निवासी सूर्यकांत मिश्र के हत्यारों की गिरफ्तारी न होने से क्षुब्ध पिता चतुर्भुज मिश्र ने एसपी को पत्र देकर 30 दिसंबर को परिवार समेत आत्मदाह करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद से ही पुलिस और प्रशासन के हाथ पांव फूल गए थे।
क्षेत्राधिकारी केशवनाथ के साथ पुलिस टीम रविवार को परिजनों से मिली और आत्मदाह के निर्णय को टालने की बात कही। इसके बाद भी परिजन नहीं मानें और उन्होंने आत्मदाह के निर्णय को नहीं बदला।
सोमवार की सुबह जब पुलिस टीम सूर्यकांत के घर पहुंची तो उसके पिता व घर के दो अन्य सदस्य पहले से ही घर से निकल चुके थे। इसके बाद पुलिस के हाथ पांव फूल गए और उनकी खोजबीन होने लगी।
दोपहर 12 बजे अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र नाथ तिवारी मेंहदावल बाईपास पर पहुंचे। वहां पर जिलाध्यक्ष प्रमोद कुमार मिश्र व हिंदू महासभा के उपाध्यक्ष आनंद शंकर पाठक ने परिजनों को राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलवाया। राष्ट्रीय अध्यक्ष तिवारी के नेतृत्व में परिजनों के साथ ही बबुन्ने कुमार मिश्र, आदित्यनाथ तिवारी, धीरू पाठक व अन्य लोग जाकर डीएम महेन्द्र सिंह तंवर से मुलाकात की।
उनका कहना था कि अगर इसी तरह से ब्राह्मणों की हत्या होती रहेगी और पुलिस कार्रवाई के बजाय अपराधियों को संरक्षण देगी तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीएम ने सारी बातें ध्यान से सुनी तथा पांच जनवरी तक आरोपितों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया। इस आश्वासन के बाद परिजन माने और अपने निर्णय को स्थगित कर दिया। पिता चतुर्भज मिश्रा ने चेतावनी दी है कि इसके बाद भी अगर खुलासा नहीं होगा तो परिणाम बहुत ही बुरा होगा।
पुलिस छावनी में तब्दील था कलक्ट्रेट : सूर्यकांत के परिजनों के रात में ही घर से निकल जाने के बाद से ही पुलिस के हाथ पांव फूल गए। इसके बाद पूरे कलक्ट्रेट क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। कलक्ट्रेट के चारों तरफ पुलिसकर्मियों के साथ ही पुलिस अधिकारीगण भी मौजूद थे। स्थिति यह रही कि मेंहदावल रोड से कोई भी चारपहिया वाहन कलक्ट्रेट की तरफ जाता था, तो बिना चेक किए उसे अंदर नहीं जाने दिया जा रहा था।