- घाघरा नदी की कटान और बाढ़ से बेघर हो गए हैं गायघाट दक्षिणी छपरा मगर्वी व नरायनपुर गांवों के 42 परिवार
पिछले वर्ष बाढ़ के दौरान मुख्यमंत्री ने की थी आवास योजना का लाभ दिलाने की घोषणा
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। घाघरा नदी की कटान और बाढ़ से बेघर हुए गायघाट दक्षिणी, छपरा मगर्वी व नरायनपुर गांवों के 42 परिवारों को सीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका है। तीन वर्ष से बेघर परिवार आवास मिलने का इंतजार कर रहे हैं। तमाम परिवार आज भी जैसे-तैसे गुजर-बसर कर रहा है। बीडीओ का कहना है कि योजना से वंचित लोगों का पंजीकरण कर लिया गया है। शासन से रकम मिलने पर उनके खाते में भेज दी जाएगी।
वर्ष 2020-2021और वर्ष 2022 में घाघरा नदी की कटान से 57 परिवार बेघर हो गए थे। वर्ष 2020 में बेघर हुए केवल तीन लोगों को सीएम आवास योजना का लाभ दिया गया। 10 लोग आज भी आवास स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं। इसी तरह वर्ष 2021 और 2022 में 44 परिवार बेघर हुए थे। नागेंद्र, बालेंद्र, चंद्रजीत, मुन्नर, राजू , कमलावती, मिठाई, सुंदर, बुद्धिराम, ईशदेव, गामा, रमाकांत, इसरावती, सुरेश समेत 22 परिवार आज भी आवास योजना से वंचित हैं।
छपरा मगर्वी और नरायनपुर में पिछले वर्ष आई बाढ़ में 13 लोगों का मकान गिर गया था। उनमें मात्र तीन लोग ही सीएम आवास योजना से लाभान्वित हो सके हैं। गायघाट दक्षिणी गांव के प्रधान बालेंद्र उर्फ पप्पू तथा छपरा मगर्वी के प्रधान प्रतिनिधि देवेंद्र यादव का कहना है कि आपदा के कारण जिनके मकान नष्ट हो चुके हैं, उन लोगों को अब तक आवास मिल जाना चाहिए था। लेकिन, विकास विभाग की लापरवाही की वजह से लोग आवास योजना से वंचित हैं। पीड़ितों का कहना है कि पिछले वर्ष बाढ़ के दौरान मुख्यमंत्री यहां आए थे। उन्होंने बाढ़ से नुकसान की भरपाई और सीएम आवास योजना का लाभ दिलाने की घोषणा की थी, लेकिन एक वर्ष बाद भी बेघर हुए लोगों को आशियाना मयस्सर नहीं हो सका है। प्रधान बालेंद्र उर्फ पप्पू ने बताया कि घाघरा नदी की कटान से बेघर हुए 44 लोगों को बसाने के लिए प्रशासन ने जिगिना में जमीन उपलब्ध कराई है। जिन लोगों को आवास स्वीकृत हो गया है, वे लोग तो अपना आशियाना बना रहे हैं। बाकी लोग लोग प्रतीक्षा में हैं।
बीडीओ रामप्रताप पांडेय ने बताया कि सीएम आवास योजना से वंचित लोगों का रजिस्ट्रेशन कर दिया गया है। शासन से धन मिलते ही उनके खाते में रकम भेज दी जाएगी।