संतकबीरनगर। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या एक रमेश दुबे की कोर्ट ने मारपीट करने व दंगा करने के मामले में दोषी पाए जाने पर दोषी पिता-पुत्र समेत तीन लोगों को एक वर्ष की अवधि के लिए सदाचार कायम रखने की शर्तों के अधीन परिवीक्षा अधिनियम में छोड़ दिया है। धनघटा थाना क्षेत्र के ग्राम मठिया मड़पौना के रहने वाले गणेश चौहान ने पुलिस को तहरीर दिया कि उनके गांव के कुसहा दुकान पर प्रत्येक दिन पत्थर फेंकते थे। इसी बात का उलाहना देने उनके पिता 19 जून 2014 को गए थे। उसी रंजिश को लेकर रात करीब आठ बजे आरोपी जगधर, अशोक, रंगी, सुरेंदर, ठाकुर, लपककर पिता को लाठी फरसा से चोट पहुंचाया। इस बीच मौके पर रूपचंद, गोगई, बेचन, राममिलन व अन्य तमाम गांव के लोग मौके पर आकर बीच-बचाव किया।
केस दर्ज होने के बाद विवेचक ने आरोप पत्र न्यायालय में भेजा। विचरण के दौरान आरोपी ठाकुर व सुरेंद्र की मृत्यु हो गई। अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या एक रमेश दूबे की कोर्ट ने पक्षों की बहस सुनने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य एवं मामले की गंभीरता देखकर हत्या का प्रयास करने सहित अन्य धाराओं में दोष मुक्त कर दिया।
आरोपी जगधर चौहान, अशोक कुमार (पिता पुत्र) व रंगी लाल को दंगा करने मारपीट करने का दोषी करार देते हुए एक वर्ष की अवधि के लिए सदाचार कायम रखने पर परिवीक्षा पर छोड़ा है। प्रत्येक आरोपी बीस-बीस हजार रुपये के निजी बंध पत्र व समान धनराशि के दो प्रतिभू जिला पर्यवेक्षा अधिकारी के समक्ष 15 दिन के अंदर निष्पादित करेंगे।