धनघटा। संठी गांव के किसान प्रभुनाथ प्रजापति की खुदकुशी के बाद चकबंदी विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। लोगों का कहना है कि प्रभुनाथ सिस्टम की भेंट चढ़ गए। पिता राजबहादुर का आरोप है कि चकबंदी अधिकारियों ने सड़क किनारे स्थित कीमती जमीन के बदले गांव के पूरब ताल में चक आवंटित कर दिया। 40 हजार रुपये रिश्वत भी दी थी। लेकिन चकबंदी विभाग के अधिकारी और मांग रहे थे। इससे प्रभुनाथ तनाव में थे।
माता गीता देवी ने रोते हुए बताया कि प्रभुनाथ कई महीनों से न्याय के लिए तहसील और चकबंदी कार्यालय के चक्कर काट रहे थे। अधिकारियों के सामने गुहार लगाने के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता रहा। स्वजनों के अनुसार, चकबंदी कर्मचारियों ने 40,000 रुपये की मांग की। प्रभुनाथ ने बिचौलिए के माध्यम से रुपये दे भी दिया था। इसके बाद भी चकबंदी कर्मी और रुपये मांग रहे थे। रुपये न मिलने से चकबंदी कर्मियों ने काम करने से मना कर दिया और खेत को ताल में भेज दिया।
जब उनकी उम्मीद पूरी तरह टूट गई, तो उन्होंने शनिवार तड़के अपनी जान दे दी। परिजनों का आरोप है कि चकबंदी विभाग के अधिकारियों ने उनकी मुख्य मार्ग वाली उपजाऊ जमीन को छीनकर उसके बदले ताल की बंजर जमीन दे दी। प्रभुनाथ इसी बात को लेकर परेशान थे कि अब उनके परिवार का गुजर-बसर कैसे होगा। प्रभुनाथ ही घर के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनकी मृत्यु के बाद पत्नी कमलेश देवी, तीन बेटों और वृद्ध माता गीता देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। इस घटना से गांव के लोगों में आक्रोश है।