-दो लाख रुपये में अन्य दो लोगों को मदद के लिए किया था तैयार
-पुलिस गिरफ्त में आने के बाद आरोपी घटना पर पर्दा डालने में रहे नाकाम
दिवाकर शुक्ल
संतकबीरनगर। कोतवाली क्षेत्र के बसलोहिया गांव निवासी बिजली मिस्त्री की हत्या को दुर्घटना का रूप देने के लिए आरोपियों ने शव को ठिकाने लगाने के बाद उस पर कई बार पर गाड़ी भी चढ़ाई थी, ताकि यह प्रतीत हो सके कि उसकी मौत दुर्घटना में हुई है। हालांकि, पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद आरोपी घटना पर पर्दा डालने में नाकाम रहे।
पुलिस पूछताछ में पता चला कि सरस्वती के प्रेमी पंकज प्रजापति के चचेरे भाई की ससुराल मकदूमपुर गांव में है। जहां आते-जाते सरस्वती से उसका प्रेम-संबंध हो गया। इधर, संतोष की शादी सरस्वती से तय हो गई। सरस्वती ने मोबाइल फोन पर संतोष से शादी न करने की बात कही और किसी अन्य से प्रेम संबंध होने की बात बताई। इस पर संतोष ने यह कहकर मना कर दिया कि अब शादी की तारीख तय हो गई है, शादी नहीं टूटेगी। वह शादी से पीछे हटने को बिल्कुल भी तैयार नहीं था।
ऐसे में सरस्वती ने प्रेमी पंकज के साथ मिलकर संतोष को मारने की योजना तैयार की। इसके लिए पंकज ने दोस्त किशन राजभर पुत्र ओमप्रकाश निवासी महुआपार भिटिया बुजुर्ग थाना वाल्टरगंज जनपद बस्ती को तैयार किया। वह अपने साथियों के साथ संतोष को रास्ते से हटाने के लिए दो लाख रुपये में तैयार हो गया। तय योजना के अनुसार संतोष से बात करने के लिए एक नए सिम व मोबाइल फोन की व्यवस्था की गई। चार अप्रैल को वह अपने दोस्त किशन राजभर और अन्य साथी कुलदीप कुमार, संदीप कुमार व राजन के साथ बस्ती में पटेल चौराहे पर इकट्ठा हुए। वहां से तय योजना के अनुसार खलीलाबाद आए।
खलीलाबाद पहुंचकर संतोष को फोन करके बिजली का काम करने के लिए नवीन मंडी के पास बुलाया। किशन ने वायरिंग का काम देने के बहाने पहले ही उससे बात करके आने का समय तय कर रखा था। शाम करीब 4:30 बजे वह बाइक से आया। पंकज व किशन के अन्य साथी मंडी के पास बस्ती की तरफ हाईवे पर ही रुके थे। किशन संतोष को मकान दिखाने के बहाने अपनी गाड़ी तक ले आया। संतोष को आगे बिठाया गया और पीछे की सीट पर किशन व उसके दो अन्य साथी बैठ गए। वे लोग बस्ती की तरफ थोड़ी दूर आगे जाने पर एक सूनसान सड़क पर गाड़ी रोक कर, गाड़ी में ही में ही उस पर शादी से मना करने के लिए दबाव बनाने लगे। इसके लिए संतोष तैयार नहीं था। फिर उन लोगों ने उसके हाथ पैर व मुंह को गमछे व रस्सी से बांधा और उसे डिकी में डाल बस्ती ले गए।
बस्ती में हाईवे के किनारे गाड़ी रोककर किशन और उसके साथियों ने पंकज से पैसे की मांग की। उसने तय रुपये में से 50,000 नकद दे दिया। उसके बाद कलवारी की तरफ गए और टांडा से आजमगढ़ की तरफ जाने वाले हाईवे पर सुनसान स्थान पर उसे डिकी से बाहर निकाला। फिर दुर्घटना का रूप देने के कई बार उसपर गाड़ी चढ़ा दी। मौत की पुष्टि होने के बाद सभी लोग वहां से वापस आ गए। इधर, घटना की जानकारी के बाद पुलिस सर्विलांस की मदद से आरोपियों को ट्रेस करने में जुट गई और दोनों प्रेमी और प्रेमिका को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।