साथां हनुमान मंदिर में श्रीराम कथा कहते असचार्य पं विकासानंन्द शास्त्री
बेलहर। सांथा हनुमान मंदिर परिसर में श्री रामकथा के आठवें दिन कथा व्यास आचार्य पंडित विकासानंद शास्त्री ने राम और भरत मिलन की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भरत पिता का अंतिम संस्कार कर अयोध्या से गुरु वशिष्ठ और तीनों माताओं के साथ वन के लिए प्रस्थान किया। निषाद राज से ज्ञात हुआ कि भारद्वाज ऋषि के आश्रम में राम पधारे हैं। ऐसा जानकर भरत ने मुनि को प्रणाम कर प्रभु श्रीराम की कुशलक्षेम पूछी। पता चला कि प्रभु चित्रकूट में निवास कर रहे हैं।
भरत की यात्रा चित्रकूट के लिए प्रस्थान हुई। देवताओं ने भरत की सेवा कर भक्तों का मान बढ़ाया। आगे जब श्रीराम ने भरत को देखा तो मन ही मन प्रसन्न हुए। राम और भरत का मिलन देखकर देवता भी पुष्प वृष्टि करने लगे। उधर भरत अयोध्या जाने को तैयार नहीं हो रहे हैं। राम ने बताया भरत पिता के बैकुंठ जाने पर प्रजा की रक्षार्थ आप हमारी चरण पादुकाओं को अयोध्या की राजगद्दी पर स्थापित करें। ऐसा वचन सुन भरत को संतोष हुआ।
आगे पादुका सिर पर धारण कर अयोध्या पुन: वापस आ गए और नंदी गांव में कुश का आसन बिछाकर 14 वर्ष अयोध्या के प्रजा की सेवा कर अपनी रामभक्ति का अनूठा प्रदर्शन किया। इसलिए संतों ने कहा है कि बड़ा भाई हो तो श्रीराम जैसा और छोटा भाई हो तो भरत जैसा। कथा के दौरान विशाल श्रीवास्तव, रामचंद्र मद्धेशिया, वीरेंद्र कुमार पांडेय, सुशील कुमार श्रीवास्तव, बबलू पासवान, संतोष कुमारअग्रहरि, उमेश शास्त्री, मनोज विश्वकर्मा, सोनू मद्धेशिया, बलिराम बरनवाल आदि मौजूद रहे।