कथा व्यास आचार्य गौरव कृष्ण शास्त्री
धर्मसिंहवा। क्षेत्र के सेंवहा चौबे गांव में चल रहे शतचंडी महायज्ञ के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य गौरव कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भवरुपी-रोग (जीवन मरण) की सबसे बड़ी अचूक दवा भगवान श्रीराम की कथा है। यह कथा प्राणी को काम, क्रोध, मोह माया से विरत करती है।
कथा व्यास ने कहा कि रामकथा हमें धर्म प्रेम और सत्य निष्ठा का मार्ग दिखाती है। साथ ही साथ रामकथा सुनने से सांसारिक सुख और आध्यात्मिक ज्ञान भी प्राप्त होता है। जिन लोगों को जीवन मरण का डर सताता है, श्रीरामकथा के आध्यात्मिक सागर में डुबकी लगाने से भय समाप्त हो जाता है।
कथा स्थल पर रात्रि के समय रामलीला कलाकारों द्वारा नारद मोह का मंचन किया गया। इस अवसर पर तमाम श्रद्धालु उपस्थित रहे।