सेमरियावां। मुकद्दस माह-ए-रमजान का दूसरा अशरा शुरू हो गया है। मंगलवार को मगरिब तक दस रोजे पूरे होने पर रमजान का पहला अशरा पूरा होगा। बुधवार से दूसरा अशरा मगफिरत शुरू हो जाएगा।
दूसरा अशरा रमजान के बीसवें रोजे के सूरज डूबने तक रहेगा। दूसरे अशरे में रोजेदार रोजे रखकर अल्लाह से मगफिरत (माफी) की दुआ करेंगे। इस दौरान अल्लाह से अपने गुनाहों की तौबा की जाती है। दूसरे अशरे में दस रोजे की इबादत मगफिरत का जरिया बनेगी।
मुकद्दस माह-ए-रमजान को लेकर लोगों में काफी उत्साह नजर आ रहा है। बच्चे, बुजुर्ग, युवा, महिलाएं सभी भूखे प्यासे रहकर अल्ल्लाह की इबादत करने में जुटे हैं। वहीं, तरावीह की नमाज में कुरआन मुकम्मल होने का भी दौर शुरु हो गया है। मौलाना शोएब नदवी कहते हैैं कि हर मोमिन बंदे को चाहिए कि वह इस मगफिरत के अशरे में अल्लाह की बारगाहे में इबादत के जरिए मगफिरत करा लें। ताकि उसके गुनाहों की माफी हो सके।
इस महीने में अल्लाह की रोजेदार बंदों पर खूब नेमतें बरसती है। गुनाह माफ हो जाते हैं। इस महीने में कुरान पढ़ना, सुनना और कुरान की तिलावत पर अमल करना जरूरी है। जो इंसान रमजान के रोजे ईमान और अहतसाब के साथ रखेगा, उसके तमाम गुनाहों को अल्लाह माफ कर देता है।
अल्लाह के तमाम वादों पर भरोसा करे। अल्लाह पाक इस माहे मुबारक में की जाने वाली सभी नेकी का सवाब सत्तर गुना बढ़ा देता है। दूसरे अशरे को मगफिरत का अशरा कहा जाता है। इस अशरे में रोजेदार रोजे रखकर अल्लाह से मगफिरत की दुआ मांगते हैं। अल्लाह मगफिरत फरमाते हैं वहीं रोजेदारों के गुनाहों को माफ करते हैं। दूसरे अशरे में दस रोजे की इबादत मगफिरत का जरिया बनेगी। इसी तरह से अल्लाह के नेक बंदे खुद को इस महीने में इबादत के जरिए जन्नत के हकदार बना लेते हैं।