दो दिन पूर्व डीपीआरओ कार्यालय के पास सफाई कर्मी पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर किए गए लेन-देन की वजह बता कर चार युवक आपस में विवाद कर रहे थे।
डीपीआरओ रामअग्रे सिंह की सूचना पर पहुंची पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर कोतवाली लाई थी। पूछताछ में बस्ती जिले के वाल्टरगंज थाना क्षेत्र के रहने वाले ब्रजेश यादव ने अपने भांजे राजनरायन यादव पर आरोप लगाया था कि उससे सफाई कर्मी पद पर नौकरी दिलाने के नाम तीन बार में 1.52 लाख रुपये लिया है।
जबकि भांजे ने बस्ती के गौर थाना क्षेत्र के अंशू सिंह पर वहीं आरोप लगाया और अंशू सिंह ने ऐसा ही आरोप नगर थाना क्षेत्र के देवनाथ सोनी पर मढ़ा था। पुलिस पहले पूरे प्रकरण को समझी।
उसके बाद पुलिस ने पीड़ित के भांजे राजनरायन यादव और अंशू सिंह व देवनाथ सोनी से अलग- अलग पूछताछ की और वीडियो रिकार्डिंग कराई।
पुलिस की जांच में यह बात सामने आया कि नौकरी के नाम पर लिए गए पैसे को तीनों युवकों ने आपस में बांट लिया और फिर खर्च कर दिया। सभी मिल कर बाद में देवनाथ सोनी पर पैसे लेकर रख लेने का आरोप मढ़ा।
नौकरी दिलाने के नाम पर कहीं कोई फार्म आदि नहीं भरवाया, जिससे कोई फ्राड जैसा कृत्य मिले। तीनों युवकों ने अपनी गलती स्वीकार की और मिल कर पीड़ित ब्रजेश यादव का पैसा लौटने का जिक्र करते हुए उससे माफी मांगी।
बाद में आपस में सभी ने सहमति बना ली और पीड़ित का पैसा वापस कर दिया। कोतवाल शमशेर बहादुर सिंह ने बताया कि लेन- देन का मामला जांच में सामने आया।
तीनों युवकों ने आपस में पैसा बांट कर फिजूलखर्जी में खर्च कर देने की गलती बताई और पीड़ित से माफी मांगी। उसके पैसे को लौटा देने पर सहमति बना कर सुलह समझौता कर लिया।
कोतवाली आए लोगों ने इस मामले के सुलझाने से पुलिस की पहल की काफी सराहना की।