संतकबीरनगर। विद्युत निगमों के निजीकरण के विरोध में सोमवार को बिजली कर्मियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया। इस दौरान आरोप लगाया कि निजी घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस पर तत्काल रोक लगाई जाए।
संघर्ष समिति के पदाधिकारी दिलीप मौर्य ने कहा कि लखनऊ में बिजली व्यवस्था में लगातार गुणात्मक सुधार हो रहा है, किंतु निजीकरण के लिए मनमाना प्रयोग कर लखनऊ की बिजली व्यवस्था को पटरी से उतारने की कोशिश की जा रही है, जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में लेसा में सभी वर्गों के मिलाकर कुल 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है।
संघर्ष समिति के के पदाधिकारी भास्कर पांडेय ने कहा कि सबसे बड़ी मार अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों पर पड़ने जा रही है। 15 मई 2017 के एक आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर 36 कर्मचारी होने चाहिए। यह आदेश आज भी प्रभावी है। वर्तमान में लेसा में 154 विद्युत उपकेंद्र है। प्रति उपकेंद्र पर 36 कर्मचारियों के हिसाब से संविदा के 5544 कर्मचारी होने चाहिए। रिस्ट्रक्चरिंग के आदेश के अनुसार लेसा के चारों क्षेत्र में मिलाकर कुल 616 गैंग होंगे और 391 एसएसओ होंगे। एक गैंग में तीन कर्मचारी काम करते हैं।
इस प्रकार 616 गैंग में 1848 संविदा कर्मी काम करेंगे साथ ही 391 एस एस ओ काम करेंगे। इस नई व्यवस्था के हिसाब से 01 नवंबर से कुल 2239 संविदा कर्मी काम करेंगे, जबकि 15 मई 2017 के आदेश के अनुसार 5544 संविदा कर्मियों को होना चाहिए। इस प्रकार 3305 संविदा कर्मी एक झटके में हटाए जा रहे हैं।
धरना में इंजीनियर मुकेश गुप्ता, आर्यन कुमार, सुनील प्रजापति, सूरज प्रजापति, नारायण चंद्र चौरसिया, आशीष कुमार, श्रवण प्रजापति, धीरेंद्र यादव , उमेश चौधरी, मनोज यादव, रमेश प्रजापति, अशोक कुमार, मनीष मिश्रा, संजय आदि मौजूद रहे।