संतकबीरनगर। ठंड के मौसम ने दस्तक दे दी है। ऐसे में टीबी, दमा, अस्थमा और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की परेशानी बढ़ रही है। ऐसे में क्षय रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। अगर सावधानी नहीं बरती गई तो यह जानलेवा भी हो सकती है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अमित सिंह ने बताया कि सर्दी में सांस की नली में सिकुड़न के साथ ही वायरल संक्रमण भी बढ़ जाता है। इससे मरीजों में सांस संबंधी बीमारियां बढ़ जाती है। सांस संबंधी परेशानी बढ़ने से टीबी के मरीज भी उपचार के लिए बार-बार अस्पताल आ रहे हैं। अगर ठंड से बचने के लिए सावधानी नहीं बरती जाती है, तो सर्द हवा और इसमें मिश्रित प्रदूषण के कण फेफड़ों में पहुंचकर टीबी की बीमारी को और जटिल बना देते हैं । इससे टीबी के मरीजों को सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है। सर्दियों के मौसम में हवा में धूल के कण जम जाते हैं। टीबी के मरीज अगर इन जमे कणों के संपर्क में आ जाते हैं, तो उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस मौसम में सावधान रहने की आवश्यकता है।
टीबी के मरीज जरूर करें मास्का का प्रयोग
क्षय रोग के जिला कार्यक्रम समन्वयक अमित आनंद बताते हैं कि टीबी के मरीजों को मास्क का प्रयोग करना चाहिए और इसी के साथ ही अपने बलगम का डिस्पोजल सही से करना चाहिए। हम इन बातों को लेकर मरीजों को जागरूक भी करते हैं। सरकार टीबी मरीजों के लिए योजना भी चला रही है। किसी परिवार में अगर कोई व्यक्ति टीबी से ग्रसित है, तो उसके परिवार की सुरक्षा के लिए भी टैबलेट दी जाती हैं।
इन लक्षणों को कतई नजरंदाज न करें
डॉ. गणेश यादव ने कहा कि वैसे तो सर्दियों के मौसम में ठंड लगने से खांसी जुकाम हो जाता है लेकिन अगर आपको लंबे समय तक खांसी हो और खांसी के साथ बलगम या खून आए, तो यह टीबी होने के संकेत हो सकते हैं। टीबी के मरीजों को भूख कम लगती है। सुस्ती और थकान महसूस होती है। इसके अलावा सीने में दर्द महसूस होता है। अगर इस तरह का कोई भी लक्षण नजर आए, तो सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज मिल सकता है। सरकार साल 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य है।