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Sant Kabir Nagar News: हवा में घुला प्रदूषण का जहर...एक्यूआई 173 के पार

Wed, 10 Apr 2024 11:47 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
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- एक्यूआई खतरनाक स्तर पर 173 के पार
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- धूल, गुबार और जल रही फसल के धुएं से बिगड़ हवा की सेहत

सड़क से उठने वाली धूल, फसल की मड़ाई और कटाई से भी बिगड़ रही हवा

संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिले में पिछले 15 दिनों में अगलगी से लगभग एक हजार बीघा गेहूं की फसल जल गई। राख में तब्दील गेंहू की फसल तेज हवा चलने से उड़ रही है। जिससे हवा की सेहत बिगड़ रही है। धूल और धुआं से हवा में जहर घुल रहा है। जिले की एक्यूआई 173 तक पहुंच गई जो खतरनाक मानी जाती है। 30 मार्च को एक्यूआई 143 पर थी। इससे सांस के रोगियों को समस्या तो हो ही रही है। इसके अलावा नए लोग भी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।
तेज हवा के साथ ही जिले में गेहूं की फसल के जलने का सिलसिला लगातार जारी है। फसल से निकलने वाले धुएं के चलते हवा में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ रहा है। फसल जब जलकर राख हो रही है तो उसकी राख हवा के साथ उड़ रही है। यह राख लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। इस राख से लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा है। यह नाक के रास्ते शरीर में प्रवेश कर रहा है। जो जाकर सीने में जमा रहता है। यही नहीं इससे सांस लेने में तकलीफ की समस्या भी आ रही है। हाल यह है कि इससे परेशान होकर लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। इसके अलावा तेज हवा के साथ ही सड़कों के किनारे फेंके गए राख भी उड़ रहे हैं। उड़ रही राख लोगों की आबोहवा खराब कर रही है। इससे प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार को एक्यूआई का स्तर 173 पर पहुंच गया।
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आंख से सांस तक के लिए खतरनाक है राख
हवा चलने से खेतों से उड़ने वाले राख आंख से सांस तक के लिए खतरनाक हैं। इससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत आ रही है। इसके अलावा अगर यह आंखों में पड़ जा रहे हैं तो इसे निकालना मुश्किल हो रहा है और लोग चिकित्सक के पास पहुंच रहे हैं।

राख के कण से आंखों में हो सकती है परेशानी
राख के कण से बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। राख के कण आंख में जाकर चिपक जाते हैं। इसे निकालना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि यह काफी पतला होता है। इससे आंख लाल भी हो जाती है। साथ ही आंख में एलर्जी पैदा करता है। आंख रगड़ने से धुंधला दिखने लगता है। ऐसे में आंख में अगर राख का कण पड़ जाए तो पानी से आंख को खूब धुले और चिकित्सक से परामर्श लें।
- डॉ. केपी सिंह, नेत्र रोग विशेषज्ञ, सीएचसी खलीलाबाद

राख का स्वास्थ्य पर अल्पकालिक व दीर्घकालिक दोनों तरह के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। हवा में मौजूद राख के कण फेफड़ों और रक्त प्रवाह में चले जाते हैं। इससे न सिर्फ इंफ्लामेशन का खतरा होता है साथ ही गंभीर स्थितियों में इसके कारण हृदय रोग, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, फेफड़ों की समस्याएं विकसित हो सकती हैं। इसके अलावा अस्थमा, टीबी, सांस की बीमारी से जुड़े मरीजों को परेशानी हो सकती है। ऐसे में लोग मास्क लगाएं और जहां तक हो सके उस जगह न जाएं जहां राख उड़ने का खतरा हो।
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डॉ. एपी मिश्र, वरिष्ठ फिजीशियन जिला अस्पताल

मिट्टी के माक्रोबायोम के लिए फसल का जलना ठीक नहीं है। खेत में आग लगने से बनी राख व धुएं से वायुमंडल में कार्बन पार्टिकल की मात्रा बढ़ जाती है। जिससे लोगों को सास लेने में समस्या आती है। यह हवा में घुले रहते हैं और लोगों की सेहत पर असर डालते हैं। ऐसे में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ गया है। इससे बचने के लिए लोग मास्क लगाकर ही बाहर निकलें।
- डॉ. नेहा सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, भूगोल विभाग, एचआरपीजी कॉलेज
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