फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हर-हर महादेव के जयकारे से गूंजे शिवालय

विज्ञापन
तामेश्वरनाथ में सावन के दूसरे सोमवार को जलाभिषेक करते श्रद्धालु।संवाद - फोटो : KHALILABAD
विज्ञापन
हर-हर महादेव के जयकारे से गूंजे शिवालय
विज्ञापन

सावन माह के दूसरे सोमवार को तामेश्वरनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए उमड़े श्रद्धालु
हरिहरपुर (संतकबीरनगर)। सावन माह के दूसरे सोमवार को तामेश्वरनाथ धाम में श्रद्धालुओं ने शिव को जलाभिषेक किया। हर-हर महादेव का जयकारा लगाते हुए शिव भक्तों ने पूजा-अर्चना की। परिसर में तैनात पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं की भीड़ संभालने के लिए जूझते रहे।
तामेश्वरनाथ धाम में महीने भर चलने वाले सावन मेले के दूसरे सोमवार को शिव को जलाभिषेक करने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। जलाभिषेक के लिए उनकी लंबी लाइन लग गई। बैरिकेडिंग के जरिए महिला और पुरुष श्रद्धालुओं को अलग-अलग लाइन में मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए व्यवस्था की गई थी।
विज्ञापन

श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए परिसर में जगह-जगह पुलिसकर्मी तैनात रहे। चेन स्नेचिंग की घटना रोकने के लिए मुख्य मंदिर और मेला परिसर मे महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। मंदिर कमेटी के ब्रह्म शंकर भारती, रोहित भारती, प्रधान के प्रतिनिधि डॉ. राम सुरेश पासवान, शशांक भारती ने बताया कि दूसरे सोमवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिव को जलाभिषेक किया।
परिसर में सचल शौचालय और पेयजल के इंतजाम रहे। फायर ब्रिगेड़ की गाड़ी भी तैनात रही। इसके अलावा स्थानीय शिव मंदिरों सिद्धेश्वरनाथ शिव मंदिर हरिहरपुर, निबिअहवा पोखरा स्थित शिव मंदिर, बेल्डुहा शिव मंदिर में भी शिव भक्तों ने जलाभिषेक किया।
विज्ञापन

...
महात्मा बुद्ध ने कराया था मुंडन संस्कार
पौराणिक मान्यताओं को समेटे ऐतिहासिक तामेश्वरनाथ धाम का शिव मंदिर महाभारत कालीन है। ऐसा लोगों का मानना है। पूर्व प्रधान नरेंद्र नाथ भारती ने बताया कि तामेश्वरनाथ धाम में शिवलिंग की स्थापना पांडवों ने की थी। अज्ञातवास के दौरान पांडव अपनी माता कुंती के साथ कुछ दिनों के लिए यहां रुके थे। तब यह क्षेत्र जंगल था, जो महाराजा विराट के साम्राज्य की सीमा में था। पांडवों ने माता कुंती के लिए शिवलिंग स्थापित की थी। मान्यताओं के अनुसार महात्मा बुद्ध ने तामेश्वरनाथ धाम में अपना मुंडन संस्कार कराया था। तब से यहां लोग अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराते हैं। परिसर में बना बुद्ध कालीन मंदिर इस बात की तस्दीक करता है।
...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें