फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sant Kabir Nagar News: महंगाई की मार ने किसानों को सिखाया केले की खेती करनाा

विज्ञापन
सांथा के टोटहा में हुई केले की खेती-संवाद
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

सांथा। क्षेत्र में किसानों का रुझान केले की खेती की तरफ बढ़ रहा है। वैसे तो किसान तैयार फसल को बाजार के अभाव में बिचौलियों के हाथ बेचने को मजबूर हैं। फिर भी परम्परागत गेहूं, धान की खेती पर खाद, बीज व सिंचाई की लागत की अपेक्षा केले की खेती पर कम लागत बैठना ही किसानों की पसंद अब केले की खेती हो गई है।
सांथा विकास खंड के उत्तरी कछार क्षेत्र के टोटहा, हरैया, मुसहरा, सिंगहाभंडा समेत कई गांव के किसान परंपरागत खेती से अपना मोह भंग कर केले की खेती की तरफ रुझान बढ़ा रहे हैं। केले की खेती से जुड़े किसान रुदल सहानी तथा नीलकमल का कहना है कि खाद, बीज व सिंचाई अन्य खेती करने पर आर्थिक बोझ ज्यादा डालते है जबकि केले की खेती एक बीघा में 15 से 20 हजार लागत लगता है। इसकी एवज में चालीस से पैंतालीस हजार के लगभग मुनाफा मिल जाता है।
विज्ञापन

केले की खेती कम लागत में अधिक मुनाफा दे रही हैं। बाजार के अभाव के बाद भी तैयार केले का फसल स्थानीय स्तर पर गोरखपुर, फरेंदा, फैजाबाद, मोदीगंज के व्यापारी आकर खरीद ले रहे है। इससे किसान को तत्काल नकद धनराशि मिल जा रही है और ऊपर से इस खेती में कम लागत भी लग रहा हैं।
विज्ञापन

टोटहा गांव के प्रगतिशील किसान बबलू मौर्या का कहना है कि केला की खेती के विकास व प्रोत्साहन के लिए सरकारी सुविधाएं नदारद है। किसान प्रदीप कुमार चौरसिया, सीताराम निषाद, सोमन मौर्य आदि का कहना है कि समय-समय पर कृषि विभाग न तो किसानों को आवश्यकता अनुसार पौधा उपलब्ध करा पाता है न ही अन्य कोई सुविधा देता हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें