संतकबीरनगर। विद्युत निगमों के निजीकरण के विरोध में शनिवार को बिजली कर्मियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया। इस दौरान बिजली कर्मियों ने सरकार से निजीकरण का फैसला निरस्त करने की मांग की। संघर्ष समिति के इंजीनियर राजेश कुमार ने कहा कि पॉवर कारपोरेशन घाटे के भ्रामक आंकड़े प्रस्तुत कर रहा है। निगम प्रबंधन सब्सिडी के 22 हजार करोड़ रुपये और सरकारी विभागों के राजस्व को भी घाटे में जोड़ रहा है। यह पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं से एक लाख 15 हजार करोड़ रुपये वसूल हो जाए तो पॉवर कॉरपोरेशन मुनाफे में हो जाएगा। राजस्व वसूली के लिए नए पद सृजित करना आवश्यक है, जबकि पॉवर कॉरपोरेशन रिस्ट्रक्चरिंग कर बड़े पैमाने पर पदों को समाप्त करने में लगा हुआ है। संघर्ष समिति के पदाधिकारी सूरज प्रजापति ने कहा कि हाल ही में विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी टैरिफ आदेश में भी यह पाया गया है कि पावर कारपोरेशन के पास एक अप्रैल 2025 को सरप्लस धनराशि है। इसी आधार पर घरेलू उपभोक्ताओं के लिए टैरिफ नहीं बढ़ाया गया है। इसी से स्पष्ट हो जाता है कि पॉवर कारपोरेशन घाटे के गलत और भ्रामक आंकड़े दे रहा है।
धरना में इंजीनियर मुकेश गुप्ता, नारायण चंद्र चौरसिया, सुनील प्रजापति, दिलीप सिंह, राघवेंद्र सिंह, अमरनाथ यादव, दुर्गा प्रसाद, प्रद्युम्न कुमार, श्रवण प्रजापति धीरेंद्र यादव, पुष्पेंद्र भारती, अशोक कुमार, आशीष कुमार आदि मौजूद रहे।