जन साहित्यिक मंच की तरफ से काव्य गोष्ठी का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को खलीलाबाद पब्लिक स्कूल के सभागार में काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें कवि पवन सबा ने ‘दिल के गुलशन में नहीं तेरे वफा की खुशबू, फिर भी कहता है मुझे रब ने मोहब्बत दी है... सुनाया जिसे सराहा गया।
वहीं वरिष्ठ कवि राजेंद्र बहादुर सिंह हंस ने अपनी रचना ‘स्वयं को ऊंचा बताना हो मुनासिब है नहीं, औरो को नीचा दिखाना तो मुनासिब है...सुनाकर वाहवाही बटोरी।
इसके अलावा कवि सूरज कुंवर सरस ने ‘एकता की नारेबारी भीड़ झंडो की सजी, है अलग झंडे अगर कम पर रही है राम जी’ सुनाई। हामिद खलीलाबादी ने ‘यह लग रहा है वो बेरहम दिखाई देते हैं, जो आसपास मेरे गम दिखाई देते हैं’ सुनाकर गोष्ठी को में चार-चांद लगाई।
गोष्ठी में राधेश्याम मिश्र श्याम ने पितृ पक्ष में कीजिए पितरों का सम्मान, मिल करके हम आज करें आओ इसका आह्वान... सुनाकर पितरों को याद किया। शायर हलीम मेंहदावली ने ‘सारा आलम ही यहां लगता है दलदल मुझको, जहां अमनो अमान हो वहीं ले चल मुझे’ सुनाकर दुनियां के बिगड़े स्वरूप की ओर इशारा किया। राजेश मृदल ने ये दुनिया के मेले, झमेले ये रेले, रहा भीड़ में भी अकेले-अकेले। सुनाकर दुनिया में बढ़ रहे अकेलेपन की ओर इशारा किया। कवि छविराज राज ने लेखनी चलती रहेगी गीत बनता जाएगा, जो पढ़ेगा वह हमारा मीत बनता जाएगा। सुनाकर कलम की महिमा का बखान किया। डॉ. अम्बर रिजवी ने तेरी खातिर न जमाने के लिए जिंदा हूं, बोझ पापों का उठाने के लिए जिंदा हूं...सुनाकर जीवन का अर्थ बताया।
कवि गोष्ठी में शारिक खलीलाबादी, ओम प्रकाश गौतम, नरसिंह नारायण कमल, शिवा पांडेय, हरिभजन सिंह आदि ने अपनी रचनाएं पढ़ी।