महुली में सुबह करीब 10.30 भ्ाी धुंध छाई हुई थी।
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पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बर्फवारी और शीतलहर ने मैदानी इलाकों में ठिठुरन बढ़ा दी है। वहीं सुबह और शाम घने कोहरे ने लोगों की रफ्तार धीमी कर दी है। शुक्रवार को दोपहर के बाद धूप निकली, लेकिन बीच-बीच में बादलों के कारण सूर्य की लुकाछिपी बनी रही। यह धूप भी लोगों को ठंड से राहत नहीं दिला सकी। ठंड के कारण पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। कोहरे से गेहूं जैसी फसलों को फायदा है तो आलू को झुलसा रोग की संभावनाएं बढ़ गईं हैं।
शुक्रवार की सुबह सड़कों पर सन्नाटा रहा, जो वाहन चले उसके चालक हेड लाइट जलाकर वाहन चलाते नजर आए। शाम को भी ऐसी ही स्थिति रही। हालांकि नगर पालिका परिषद खलीलाबाद ने शहर के विभिन्न चौराहों पर अलाव की व्यवस्था की है, जहां बड़ी संख्या में लोग अलाव के सहारे ठंड से बचाव करते नजर आए। साथ ही मेंहदावल बाईपास चौराहे पर रैन बसेरा भी बनाया गया है, ताकि जो लोग रात्रि के समय शहर में आए और उन्हें सिर छिपाने के लिए जगह न हो वह इस रैन बसेरा में रह सके। यहां पर एक कर्मचारी की नियमित ड्यूटी नगर पालिका प्रशासन ने लगाई है। मौसम विज्ञानी डॉ. पद्माकर का कहना है कि अभी 24 घंटे में मौसम का यही क्रम रहेगा।
शुक्रवार को अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि आर्द्रता करीब 70 फीसदी रही। छह किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चलती रहीं। कृषि के जानकारों का कहना है कि कोहरा तो गेहूं के लिए फायदेमंद है लेकिन आलू की उपज प्रभावित हो सकती है। वहीं बस्ती कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसएन सिंह ने किसानों को चेताया है कि गेहूं, अरहर आदि फसलों की हल्की सिंचाई कर दें। इंडोसिलियम 45 या फफूंदनाशक का छिड़काव करें जिससे पाला असर नहीं डाल पाएगा। ऐसे मौसम में सर्वाधिक प्रभाव आलू पर पड़ता है। पाला पड़ने से उपज भी प्रभावित होती है।