नगर पंचायत हरिहरपुर में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते आचार्य देवव्रत जी महराज
हरिहरपुर। नगर पंचायत हरिहरपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक आचार्य देवव्रत ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा कोई साधारण पुराण नहीं है। उन्होंने कहा कि वेदों का सार गायत्री मंत्र है और श्रीमद्भागवत महापुराण गायत्री परख पुराण है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा गायत्री मंत्र का विस्तार है। इसलिए धीमही से इस महापुराण की शुरुआत होती है। उन्होंने कहा कि मंत्र को मनन करना चाहिए, क्योंकि मंत्र जप करने की चीज है। किस देवता के लिए कौन सी चीज की माला होनी चाहिए इसकी व्याख्या की। ओम शब्द की व्याख्या करते हुए उसके उच्चारण की विधि बताई। माला जपने की विधि बताते हुए कहा कि प्रात:काल माला नाभि के पास जपते हैं। दोपहर में हृदय के समीप और सायंकाल ज्ञान चच्छु के पास जप किया जाता है। गायत्री मंत्र को चार पदों में जपते हैं। जिन्हें गायत्री मंत्र जपने का अधिकार नहीं है वह महामंत्र का जप करे। उन्होंने कहा कि महामंत्र जपने के साथ गाया भी जा सकता है। इसमें भी जप और गाने की अलग अलग विधा है।
इस दौरान मुख्य यजमान आशुतोष पांडेय, शक्ति कुमार पांडेय, अनिमेश पांडेय, वंश विकास पांडेय, परमात्मा, जुग्गीलाल, मिश्रीलाल आदि मौजूद रहे।