संतकबीरनगर। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने 10 दिन पूर्व बोतल बंद पानी की छह कारखानों का लाइसेंस निलंबित कर दिया था और पानी के उत्पादन पर रोक लगा दी थी। अब इन कारखानों के संचालक अपने-अपने पानी की फूड ग्रेड पैकेजिंग के तहत जांच कराएंगे। इसके बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से गठित मंडल मुख्यालय की टीम पानी की गुणवत्ता की जांच करेगी। इसमें खराबी आने पर इन कारखानों का लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।
20 जनवरी को सहायक आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन सतीश कुमार ने सुरक्षित व स्वच्छ गुणवत्ता वाले पानी उपलब्ध कराने को लेकर बोतल बंद पानी के कारखाने की जांच की थी। शाही बेवरेजेस इंडस्ट्रियल एरिया खलीलाबाद, गंगोत्री फूड केयर प्राइवेट लिमिटेड इंडस्ट्रियल एरिया खलीलाबाद, रॉयल एंटरप्राइजेज इंडस्ट्रियल एरिया खलीलाबाद, क्रश बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड मोहदीनपुर खलीलाबाद, ग्रेजुएट इंटरप्राइजेज सलाहाबाद धनघटा, श्री बालाजी फूड एंड बेवरेज शांति राजनौली, धनघटा की जांच हुई थी।
इन सभी जगहों पर बोतल बंद पानी की जांच की गई। यहां पर बोतल प्लास्टिक फूड ग्रेड का नहीं मिला था। उसका स्तर काफी खराब था। कंपनियों में पानी की गुणवत्ता की जांच के कोई इंतजाम नहीं है। सिर्फ आरओ किया जा रहा था और उसे बोतल में पैक कर रहे थे। यहां पर काफी गंदगी मिली थी। इन सभी फर्मों का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था। अब खाद्य विभाग ने इन सभी फर्म संचालकों से अपने पानी की गुणवत्ता की फूड ग्रेड पैकेजिंग के तहत जांच कराने का निर्देश दिया। संचालक अपने पानी की खुद जांच कराएंगे। इसके बाद मंडल मुख्यालय पर गठित टीम खुद की पानी की जांच करेगी। इसमें मानक न मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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सहालग में बढ़ जाती है पानी की खपत
सहालग का समय चल रहा है। ऐसे में पानी की खपत बढ़ जाती है। जहां ठंड के मौसम में पानी की खपत ब्रांडेड कंपनियों की जिले में अनुमानित तीन लाख लीटर तक है, जबकि लोकल पानी का कोई सीमा नहीं है। वहीं सहालग और गर्मी के समय इसकी खपत ब्रांडेड कंपनियों की लगभग 20 लाख लीटर तक है। स्थानीय स्तर पर बने पानी कारखानों का कोई आंकड़ा नहीं है। यहां पर गीडा से भी लोकल कंपनियों का पानी आता है। ऐसे में पानी खरीदते समय जांच परख लिया करें
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जिले में पानी की जांच के इंतजाम नहीं
- जिले में पानी की जांच के लिए सरकारी स्तर पर कोई इंतजाम नहीं है। डिब्बों का पानी हर घरों में लोग ले रहे है। लेकिन इसकी गुणवत्ता की जांच नहीं होती है। इन डिब्बों में भरा जाने वाला पानी लेकर लोग बेधड़क पी रहे हैं। इससे तमाम तरह की बीमारियां पनप रही है। पानी के गुणवत्ता की जांच आम आदमी को खुद करानी होती है। इसके लिए जल निगम में 400 रुपये शुल्क है। जिसके बाद जांच कर उसकी रिपोर्ट दी जाती है।
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पानी की शुद्धता की जांच करें।
- पानी के पीएच वैल्यू से पानी की शुद्धता की जांच कर सकते हैं। पानी का पीएच न्यूट्रल होता है। अगर लिटमस पेपर का पीएच माप 7 या 8 के बीच आता है तो इसका मतलब यह पानी पीने लायक है।
- पानी में मौजूद अशुद्धियों को जांचने के लिए टीडीएस मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। डब्लूएचओ के मुताबिक, शुद्ध पानी का टीडीएस लेवल 100 से 250 पार्ट्स प्रति मिलियन है तो आप उसे पी सकते हैं। इससे ज्यादा लेवल होने पर पानी बिल्कुल न पीएं।
- असली बोतल की सील और पैकेजिंग अच्छी होनी चाहिए। अगर बोतल की सील टूटी है तो उसे खरीदने की गलती ना करें। इसके अलावा आप पानी की बोतल खरीदते समय उसका डिसक्रिप्शन को अच्छे से पढ़ें, जिसमें पानी का सोर्स लिखा होता है।
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दूषित पानी के प्रतिदिन आते है 20 से 25 मरीज
जहां तक हो सके तो पानी को उबाल कर ठंडा करने के बाद ही पीना चाहिए। इसमें पानी में जो भी बैक्टीरिया होते हैं वे मर जाते हैं। दूषित पानी पीने से पेट से संबंधित बीमारी होती है। इससे उल्टी, दस्त, पेट में दर्द आदि हो सकता है। इस तरह के प्रतिदिन 20 से 25 मरीज जिला अस्पताल में आते हैं और उन्हें पानी को उबाल कर पीने की सलाह दी जाती है। -डॉ रमाशंकर, फिजिशियन जिला अस्पताल
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बोतलबंद पानी के जो कारखाने बंद हुए थे, उनके पानी की गुणवत्ता की जांच संचालक खुद कराएंगे। उसके बाद मंडल स्तर पर गठित टीम जांच करेगी। इसमें अगर गुणवत्ता खराब मिलेगी तो संबंधित का लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। इसके साथ ही सीजेएम न्यायालय में वाद भी दायर कराया जाएगा। -सतीश कुमार, सहायक आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन