संतकबीरनगर। वन विभाग की जंगल की जमीन का दस साल पहले पट्टा हो गया और विभाग को पता हीं नहीं। मामला तब सामने आया जब उस जमीन के एक हिस्से को खरीदने की कोशिश में लगे एक सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार ने डीएम कोर्ट में पट्टा निरस्त करने की अपील की। अब डीएम ने एडीएम न्यायिक के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम को पट्टा आवंटन की जांच कर एक हफ्ते में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
खलीलाबाद तहसील के धौरहरा गांव में जंगल की 50 बीघा जमीन है, जिसमें 20 गाटा हैं। सूत्रों के अनुसार, करीब दस साल पहले इस जमीन में पट्टा आवंटन किया गया है। एक रिटायर्ड नायब तहसीलदार ने करीब सात महीने पहले पट्टा पाए एक व्यक्ति से जमीन खरीदने की इच्छा जताई। वह तैयार हो गया। पर पट्टा उसके नाम पर होने से खरीद-बिक्री में परेशानी हो रही थी। इस पर एक सप्ताह पहले रिटायर्ड नायब तहसीलदार ने डीएम कोर्ट में पट्टा आवंटन निरस्त करने की अपील की।
डीएम आलोक कुमार के समक्ष फाइल पहुंची तो पता चला कि यह पट्टा जंगल की जमीन पर है। जंगल की जमीन का पट्टा कैसे हुआ और क्या पूरे 50 बीघा जमीन का पट्टा हो चुका है या कुछ शेष है, इसकी जांच के उन्होंने एडीएम न्यायिक चंद्रकेश सिंह के नेतृत्व में अपर एसडीएम कलक्ट्रेट की टीम का गठन किया। उन्होंने टीम से एक सप्ताह में जांच कर रिपोर्ट तलब की है।
जंगल की जमीन का नहीं हो सकता पट्टा
तहसील कर्मियों की माने तो जो वन विभाग के जंगल की जमीन का पट्टा आवंटन नहीं हो सकता। अगर यह हुआ है तो इसमें तहसील कर्मियों की मिली भगत हो सकती है। कई ऐसी जमीनें हैं जिनकी जानकारी सामान्य लोगों को नहीं है और न उस विभाग को ही है। अब मामला खुला है तो इसमें कई कर्मचारी व अधिकारी फंस सकते है।
धौरहरा गांव में जंगल की जमीन के पट्टा आवंटन का मामले में तहसील कर्मियों से रिकार्ड तलब किए गए हैं। रिकार्ड आने के बाद देखा जाएगा कि नियमानुसार यह आवंटन है कि नहीं। पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। जांच के बाद रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी।
- चंद्रकेश सिंह, एडीएम न्यायिक