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Sant Kabir Nagar News: सीजेएम कोर्ट ने मौलाना को 30 अक्तूबर तक का दिया समय

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संतकबीरनगर। ब्रिटिश नागरिकता और विदेशी धनराशि से जुड़े मामले में मौलाना शमशुल हुदा खान की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट (सीजेएम कोर्ट) ने मौलाना को 30 अक्तूबर तक का समय दिया है। कोर्ट ने 20 हजार रुपये के बंधपत्र पर जमानती वारंट जारी किया है। अब इस मामले में आगे की न्यायिक कार्रवाई के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच और कार्रवाई पर भी निगाहें टिकी हैं।
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मौलाना शमशुल हुदा के खिलाफ विदेशी धनराशि और उससे संपत्तियां अर्जित किए जाने के आरोपों की जांच विभिन्न एजेंसियों की ओर से की जा रही है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में मौलाना और उनके पुत्र से जुड़ी संपत्तियों तथा बैंक खातों के संबंध में जांच पूरी हो गई है।
एसआईटी ने मामले में आरोप पत्र भी न्यायालय में दाखिल किए हैं। मामले में ईडी की कार्रवाई पहले ही हो चुकी है। जांच एजेंसी ने मौलाना के घर और मदरसे में छापेमारी कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और अभिलेख अपने कब्जे में लिए थे।
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जांच का केंद्र विदेशी स्रोतों से प्राप्त धन और उससे खरीदी गई संपत्तियां हैं। आरोप है कि विदेश से प्राप्त करोड़ों रुपये की धनराशि के जरिये संतकबीरनगर में जमीन और अन्य संपत्तियां खरीदी गईं। जांच के दौरान मौलाना और उनके बेटे के नाम से जुड़ी कई संपत्तियों का ब्योरा भी सामने आया है। एसआईटी के अनुसार, छह बैंकों की 21 शाखाओं के जरिये विदेशी धनराशि से खरीदी गई करीब एक अरब रुपये मूल्य की चल-अचल संपत्तियों को चिह्नित किया गया है। इनमें मोतीनगर, कांटे और देवरियालाल क्षेत्र की संपत्तियां शामिल बताई गई हैं।


मदरसे की जमीन और भवन पर कानूनी पेंच

मौलाना के खलीलाबाद के मोतीनगर स्थित मदरसे की जमीन को लेकर लंबी कानूनी प्रक्रिया चल रही है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) ने मई में जिलाधिकारी और मंडलायुक्त के पूर्व आदेशों को निरस्त किया था। हाईकोर्ट ने उप-जिलाधिकारी न्यायालय (एसडीएम कोर्ट) को गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने का निर्देश दिया। इसके बाद एसडीएम कोर्ट में नए सिरे से सुनवाई हुई। अगस्त में एसडीएम कोर्ट ने मौलाना और उनके बेटे की आपत्तियां खारिज करते हुए मदरसे की 64 एयर भूमि राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया। मदरसा भवन निर्माण में मानचित्र स्वीकृति नियमों के उल्लंघन पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई को भी न्यायालय में चुनौती दी गई।



उच्च न्यायालय में लंबित याचिका और न्यायिक स्थिति

एसडीएम कोर्ट के जमीन और मदरसे से संबंधित आदेश के खिलाफ मदरसा प्रबंधन की ओर से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। ऐसे में अब मामले में आगे की स्थिति हाईकोर्ट के आदेश पर निर्भर करेगी। इससे पहले भी मदरसा प्रबंधन की ओर से विभिन्न प्रशासनिक आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है। हाईकोर्ट ने पूर्व के एक मामले में प्रशासन को विधिक प्रक्रिया के तहत आगे कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी थी। सीजेएम कोर्ट से 30 अक्तूबर तक का समय मिलने और 20 हजार रुपये के बंधपत्र पर जमानती वारंट जारी होने के बाद अगली न्यायिक कार्रवाई उस तारीख पर होगी। मदरसा प्रबंधन की हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर आने वाला आदेश जमीन और भवन से जुड़े मामले की आगे की दिशा तय करेगा।

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ईडी की जांच और भविष्य के घटनाक्रम

मौलाना प्रकरण में अब तीन स्तरों पर घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहला, सीजेएम कोर्ट में चल रही आपराधिक कार्रवाई है। दूसरा, एसडीएम कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में लंबित चुनौती है। तीसरा, विदेशी धनराशि व संपत्तियों से जुड़े मामले में ईडी की जांच है। ईडी की कार्रवाई पहले ही हो चुकी है, जिसमें महत्वपूर्ण कागजात और अभिलेख जब्त किए गए थे। जांच का केंद्र विदेशी स्रोतों से प्राप्त धन और उससे खरीदी गई संपत्तियां हैं। इस पूरे प्रकरण में आने वाले न्यायिक आदेशों और ईडी की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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