कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों के वार्डेन को अब अपने विद्यालय के बजट के लिए जिले स्तर पर चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
वार्डेन अपने विद्यालय का बजट खुद तैयार करेंगी। इसके साथ ही एकाउंटेंट से हस्ताक्षर से बजट का प्रस्ताव भेजेंगी। वार्डेन के प्रस्ताव पर ही राज्य परियोजना कार्यालय बजट जारी करेगा।
सरकार ने कस्तूरबा विद्यालयों की दशा का सुधारने के लिए बजट बनाने का अधिकार वार्डेन को दे दिया है। पहले यह बजट जिला स्तर पर तय होता था। उसी के अनुसार विद्यालयों को बजट जारी होता था।
जिससे विद्यालयों की आवश्यकतानुसार धन नहीं मिल पाता था। राज्य परियोजना कार्यालय लखनऊ ने पिछले दिनो हुई जिला समन्वयक बालिका शिक्षा की बैठक में साफ कर दिया था कि कस्तूरबा विद्यालयों का बजट वार्डेन और विद्यालय के एकाउंटेंट ही बनाएंगे।
विद्यालय में शिक्षक मानदेय, रसोईया मानदेय, बालिकाओं के लिए ड्रेस, खाना, भवन की मरम्मत, रंगाई पुताई समेत अन्य सभी जरूरत के सामानों की मांग वार्डेन करेेंगी। वार्डेन और एकाउंटेट के संयुक्त हस्ताक्षर से बजट का प्रस्ताव तैयार होगा। प्रस्ताव को जिला समन्वयक बालिका शिक्षा के पास भेजा जाएगा।
जो उसे राज्य परियोजना कार्यालय में भेजेंगे। बजट बनाने के लिए वार्डेन और एकाउंटेंट को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसको लेकर बीएसए कार्यालय में तैयारी शुरू हो गई है। बजट बनाने का अधिकार मिलने पर वार्डेन और एकाउंटेंट में खुशी है।