रामप्रीत के घर का हाल जानते मोहनाग गांव पहुंचे एसओ और अन्य लोग।
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तीन वर्ष पहले पिता के आंख की रोशनी चली गई। मजबूरन बेटे को अमरडोभा की चाय की दुकान पर काम करना पड़ा। इसी के सहारे छह लोगों के परिवार का जीवन यापन हो रहा है। बृहस्पतिवार को ऑपरेशन ‘स्माइल’ के तहत छापेमारी में मिले पांच बच्चों में से एक रामप्रीत की कहानी कुछ ऐसी ही है। इस बच्चे की कहानी सुनकर हर शख्स द्रवित हो उठा। एसओ की मदद की पहल को लोगों के हाथों हाथ लिया।
मोहनाग गांव निवासी बहादुर(55) के पास न रहने को घर नहीं, न खाने को पौष्टिक भोजन। खुले आसमान में पॉलिथीन का घरौंदा ही है निवास स्थल। मजदूरी करके छह सदस्यीय परिवार का भरण-पोषण करने वाले इस शख्स के दोनों आंखों की रोशनी तीन साल पहले चली गई। भोजन की दिक्कत होने लगी।
गांव के जिम्मेदारों ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया तो मजबूरन पत्नी आरती ने बड़े बेटे रामप्रीत (11) को अमरडोभा स्थित चाय की दुकान पर काम के लिए लगा दिया। उनके दो लड़के व दो लड़कियां हैं। रामप्रीत के बाद रामसूरत (9), महिमा(5), जबकि एक बेटी सुनैना बस्ती में एक रिश्तेदार के यहां रहती है। आरती भी गांव के जो कुछ काम मिलता है वह कर लेती हैं। थानाध्यक्ष बखिरा दिनेश यादव ने बताया कि ‘ऑपरेशन स्माइल’ के तहत बुधवार शाम अमरडोभा में छापेमारी कर चाय की दुकानों से पांच नाबालिग बच्चों को बरामद किया गया।
पूछताछ में संतकबीरनगर जिले की सीमा से सटे गोरखपुर जिले के सहजनवां क्षेत्र के मोहनागे निवासी रामप्रीत उर्फ गब्बर की कहानी सुनकर आंखें नम हो गईं। बृहस्पतिवार को बच्चे को लेकर उसके घर पहुंचे। रामप्रीत के पिता दोनों आंखों से दिव्यांग हैं। एसओ ने परिवार की मदद करते हुए आर्थिक सहायता के साथ दो ट्राली ईंट देने का आश्वासन दिया। वहीं एसआई एसबी सिंह ने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी। इसके बाद ग्राम प्रधान रामेंद्र त्रिपाठी ने मकान बनाने में बालू, सीमेंट, मजदूरी एवं टिन शेड लगाने की जिम्मेदारी उठाई।
कहा कि इनका नाम पात्र गृहस्थी में करा दिया जाएगा। आगे भी पीड़ित परिवार को हर संभव मदद मुहैया कराई जाएगी। वहीं खलीलाबाद के निजी चिकित्सक डॉ. अशरफ अली ने बहादुर की आंखों की रोशनी लौटाने के लिए आगे आए हैं। उन्होंने रोशनी लौटाने में आने वाले सभी खर्च उठाने की बात कही है।