संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में शुक्रवार को मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत विश्व हृदय दिवस पर हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने अपने-अपने विचारों को रखा। हृदय की सेहत को लेकर सावधानी बरतने पर जोर दिया गया।
हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत करते हुए सीएमएस डॉ. महेश प्रसाद ने कहा कि लोगों का ब्लड प्रेशर बढ़ा रहता है, लेकिन उन्हें पता ही नहीं रहता। हृदय में धीरे-धीरे खराबी आती रहती है। जिन रोगियों का अध्ययन किया गया, उनमें बहुत कम ने कोलेस्ट्राल पता करने के लिए ब्लड की जांच कराई थी। लोग हृदय की सेहत को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं। अटैक पड़ने पर जब अस्पताल पहुंचते हैं तो बीमारी पता चलती है। ब्लड प्रेशर के रोगी नाक से खून आने, घबराहट बढ़ने पर जांच कराते हैं।
डॉ. तन्वांगी मणि त्रिपाठी ने कहा कि हृदय हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है जो पूरे शरीर में रक्त पंप करता है। इस प्रक्रिया में आने वाली किसी भी तरह की समस्या का असर संपूर्ण स्वास्थ्य पर हो सकता है। इसके लिए आहार और लाइफस्टाइल दोनों को ठीक रखने पर ध्यान देते रहना चाहिए। चूंकि अब कम उम्र के लोग भी हृदय रोगों के शिकार हो रहे हैं इसलिए जरूरी है कि हृदय को स्वस्थ रखन के लिए निरंतर प्रयास किया जाए। उन्होंने कहा कि ब्लड प्रेशर बढ़ने पर महिलाएं सबसे अधिक लापरवाही बरतती हैं। उन्हें हार्ट अटैक आने पर सीने में तेज दर्द नहीं होता। उन्हें घबराहट, सांस फूलना और थकान का लक्षण आता है। इन लक्षणों को वे गंभीरता से नहीं लेतीं।
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. भवनाथ पांडेय ने कहा कि लोगों के लिए जरूरी है की हृदय की सेहत का ध्यान रखें। इससे संबंधित चेतावनी संकेतों को नजर अंदाज न करें। हृदय रोग, दुनिया में मौत के प्रमुख कारणों में से एक है। इन संकेतों का शीघ्र पता लगाकर इलाज प्राप्त करना आवश्यक है। इस दौरान डॉ. एके पाठक, डॉ. बलवंत त्रिपाठी, अमरेंद्र कुमार, कुलदीप, मदन चंद, शैलेंद्र श्रीवास्तव, अजीतनाथ तिवारी आदि मौजूद रहे।