संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉक्टर विजय कृष्ण ने स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। कहा कि स्वामी विवेकानंद आधुनिक भारत के महान संत एवं चिंतक थे।
उन्होंने वेदान्त दर्शन का गहन अध्ययन किया और उपनिषद्, भागवत गीता का अध्ययन और उनमें प्रतिवादित जीवन दर्शन का अनुशरण किया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर प्रताप विजय कुमार ने कहा कि स्वामी विवेकानंद भारतीय संस्कृति के अग्रणी चिंतक एवं भारत के महान विभूति थे।
कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर पूर्णेश नारायण सिंह ने आए हुए अतिथियों एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया और स्वामी विवेकानन्द जी के जीवन दर्शन पर चर्चा करते हुए कहा कि विवेकानन्द जी का दर्शन आज के युवाओं के लिए अनुकरणीय है।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद जी के प्रतिमा पर पुष्पार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉक्टर अनुभव श्रीवास्तव, डॉक्टर योगेश पाल, डॉक्टर ब्रजेश त्रिपाठी, डॉक्टर मनोज कुमार भारतीय, डॉक्टर हेमंत कुमार गौतम, अतुल कुमार रावत, दुर्गा प्रसाद दीक्षित, मनोज कुमार, अजय कुमार श्रीवास्तव, मंजुल ज्योति वर्मा आदि मौजूद रहे।