मेंहदावल। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा तीन और चार के विद्यार्थियों की रचनात्मकता को नई दिशा देने के लिए जिले में ‘बांसुरी’ कला नाम की पुस्तिका लागू की जा रही है। पहली बार विद्यार्थियों को कला विषय की अलग पुस्तक उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे बच्चे चित्रकला, संगीत, नृत्य व रंगमंच जैसी विधाओं को व्यवस्थित रूप से सीख सकेंगे।
बीईओ महेंद्रनाथ त्रिपाठी ने बताया कि इस किताब से प्राथमिक स्तर पर गतिविधियों पर आधारित शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा। बच्चों को अब किताब के साथ-साथ व्यावहारिक गतिविधियों के जरिये सीखने का अवसर मिलेगा। बांसुरी’ पुस्तिका में चित्र बनाना, कागज से आकृतियां तैयार करना, मिट्टी से मॉडल बनाना, गीत-संगीत सीखना और समूह में प्रस्तुति देना जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
इससे बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मक सोच और सांस्कृतिक समझ विकसित होगी। निर्धारित कला शिक्षा के लिए कुल 100 घंटे का सत्र तय किया गया है। इसमें चित्रकला, संगीत, नृत्य और रंगमंच के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है। प्रत्येक सप्ताह कला गतिविधियों के लिए विशेष कक्षाएं संचालित होंगी, जिससे बच्चों को नियमित अभ्यास मिल सके। समग्र विकास पर फोकस इस पहल से छात्रों में सीखने के प्रति रुचि बढ़ेगी और उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा।
इस नई व्यवस्था से प्राथमिक शिक्षा में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि शिक्षकों को भी इसके लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार बेहतर मार्गदर्शन दे सकें। उन्होंने बताया कि ‘बांसुरी’ नामक पुस्तिका के माध्यम से बच्चों को गतिविधि आधारित शिक्षा दी जाएगी, जिससे उनकी रचनात्मक क्षमता, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक समझ विकसित होगी।