संतकबीरनगर। स्कूली शिक्षा में ड्रापआउट दर शून्य करने के लिए पांचवीं से छठी, आठवीं से नौवीं और दसवीं से 11वीं कक्षा के विद्यार्थियों की अब निगरानी की जाएगी। शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी छात्र-छात्रा बीच में पढ़ाई न छोड़े। हर बच्चा अगली कक्षा में पहुंचे और शत-प्रतिशत नामांकन बना रहे।
जनपद में 1247 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें करीब 1.40 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। जबकि जिले में 39 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। विद्यालयों में बच्चों के अधिक से अधिक नामांकन करने के लिए स्कूल चलो अभियान चलाया जाता है।
इसके साथ ही विद्यालयों में बच्चों के ठहराव के लिए मध्याह्न भोजन योजना सहित अन्य गतिविधियां कराई जाती हैं। आउट ऑफ स्कूल बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए शासन की ओर से विद्यालय स्तर पर अभियान चलाया गया। स्कूली शिक्षा में तीन चरण महत्वपूर्ण बताए गए हैं।
इनमें बच्चों का पांचवीं से छठी, आठवीं से नौवीं और दसवीं से 11वीं कक्षा में जाना शामिल है। इसी दौरान अधिकतर बच्चे या तो स्कूल बदलते हैं या उनकी पढ़ाई छोड़ने का जोखिम रहता है। इसे रोकने के लिए अब प्रत्येक विद्यालय को अपने छात्रों की ठीक से निगरानी की जाएगी। खासकर जूनियर हाई स्कूलों में यह सुनिश्चित होगा कि कक्षा आठ पास करने वाले प्रत्येक का कक्षा नौ में प्रवेश हो।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर जनपद में इसकी कवायद शुरू कर दी गई है। ड्रापआउट बच्चों की निगरानी की जाएगी। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक शिक्षक लगातार छात्रों से संवाद करते हुए उन्हें प्रेरित करेंगे।