धनघटा। प्रबंधकीय विवाद के चलते मड़हाराजा मदरसे के छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया है। शनिवार को छात्र मदरसा छोड़कर जाने लगे। जानकारी होने पर क्षेत्र के संभ्रांत लोगों ने छात्रों को समझा-बुझाकर मदरसे में वापस लाने का प्रयास किया लेकिन डरे-सहमे छात्रों ने मदरसे की जगह गांव की मस्जिद में शरण ली।
इन छात्रों ने डीएम से मदरसे में शैक्षणिक माहौल स्थापित करने की मांग की है। महुली क्षेत्र के मड़हाराजा में वर्ष 1966 में गांव के ही सोहराब पुत्र नजीर ने मदरसा इस्लामिया की स्थापना की थी। वर्ष 2015 में प्रबंधकीय विवाद शुरू हो गया। मामला हाईकोर्ट तक गया। हाईकोर्ट ने सोसायटी रजिस्ट्रार को छह सप्ताह में प्रबंधक का चुनाव कराने का आदेश दिया था।
तब से मामला न्यायालय में लंबित है, लेकिन शिक्षण कार्य निरंतर चलता रहा। मदरसे में लगभग 250 छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं। 55 बाहरी छात्र इस आवासीय मदरसे में रहते हैं। शनिवार को बिहार के कई छात्र सामान समेट कर घर जाने लगे। छात्र महुली कस्बे में पहुंचे तो क्षेत्र के कुछ लोगों ने उन्हें वापस जाने के लिए समझाया।
इनमें भागलपुर (बिहार) के छात्र मो. सलीम, अरशद, मो. असजद, मो. अंसार, अब्दुल शुभान, इरफान, अफजल, मो. रफीक, इम्तियाज, मो. रहमत, मेहताब आदि ने कहा कि प्रबंधकीय विवाद में शैक्षणिक माहौल बिगड़ गया है। छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। इसके चलते वे अपने घर लौटना चाहते हैं।
छात्र मदरसे में वापस जाने को तैयार नहीं हुए तो उनका सत्र खराब होने की बात कहकर उन्हें वापस मडहाराजा गांव की मस्जिद में शरण दी गई। ग्रामीणों ने मदरसे के शिक्षकों को भी मस्जिद में ही उन्हें पढ़ाने के लिए राजी किया। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी तन्मय पांडेय ने बताया कि मदरसे का शैक्षणिक माहौल बना रहे, इस दिशा में प्रयास जारी हैैं। वे खुद मामले की जांच करने जाएंगे और छात्रों को सुविधाओं के साथ सुरक्षा भी मुहैया कराएंगे।
उधर, प्रबंधकीय विवाद की वजह से छात्रों के परिसर छोड़ने के बाबत पूछने जाने पर एक पक्ष के छितही निवासी अब्दुल हक का कहना है कि वह मदरसे पर मौजूद थे। इन दिनों मदरसे में छुट्टी चल रही है। बिहार के छात्र कहने लगे कि वे अब अपने गांव जाएंगे। छात्रों को समझाने की कोशिश की गई लेकिन वे नहीं माने। मदरसे में भय का माहौल पैदा करने का आरोप पूरी तरह निराधार है।
जबकि दूसरे पक्ष के मडहाजोत गांव निवासी मुहम्मद सईद अख्तर का कहना है कि छात्र मदरसा छोड़कर अपने घर जा रहे थे। इसकी जानकारी होते ही सहयोगी बबलू हाफिज और कुछ शिक्षकों को भेजकर उन्हें समझा-बुझाकर मदरसा भेजने की कोशिश की गई लेकिन छात्र भय की वजह से वहां नहीं गए। उनकी रहने-खाने और पढ़ाई की व्यवस्था मस्जिद में की गई है।