संतकबीरनगर। शहर में छुट्टा पशुओं की भरमार है। यह पशु सड़क और चौराहों पर कहीं भी खड़े रहते हैं, तो कहीं बैठे दिख जाते हैं। लोगों को इससे परेशानी होती है। नगर पालिका परिषद ने शहर के मोहद्दीनपुर मोहल्ले में गो-आश्रय केंद्र बनाने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था, लेकिन करीब एक साल बीत जाने के बाद भी इसे मंजूरी का इंतजार है।
शहर में बड़ी संख्या में छुट्टा पशु विचरण करते हैं। इसके चलते यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। यह छुट्टा पशु सड़क पर कहीं पर भी झुंड में बैठ जाते है, जिससे आने-जाने में समस्या बढ़ गई है। छुट्टा पशु फल, सब्जी व अन्य दुकानदारों के सामान को भी नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार छुट्टा पशुओं को हटाने के दौरान हमलावर हो जा रहे हैं। साथ ही इनकी धमा-चौकड़ी के चलते वाहन चालक भी दुर्घटना के शिकार हो जा रहे हैं।
इस समस्या को दूर करने के लिए नगर पालिका प्रशासन ने मोहद्दीनपुर मोहल्ले में एक करोड़ 65 लाख की लागत से पशु आश्रय केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है, लेकिन अभी तक इसकी मंजूरी नहीं मिल सकी है। इसके कारण समस्या बनी हुई है। हालांकि पालिका प्रशासन बीच- बीच में छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाती है, लेकिन इन्हें रखने के लिए पर्याप्त स्थान न होने से यह अभियान भी जोर नहीं पकड़ पा रहा है।
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कान्हा पशु आश्रय केंद्र में 60 पशुओं के रखने की है व्यवस्था
शहर के मड़या में कान्हा पशु आश्रय केंद्र बनाया गया है, लेकिन यहां पशुओं के रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। नगर पालिका के मुताबिक कान्हा पशु आश्रय केंद्र में 60 पशुओं के रखने की व्यवस्था है। ऐसे में बड़ी संख्या में विचरण कर रहे पशुओं को पकड़ने के बाद कहां रखा जाए, यह सवाल बना हुआ है। शहर के रहने वाले दुर्गेश मौर्य, अजीत कुमार आदि ने बताया कि यदि मोहद्दीनपुर में पशु आश्रय केंद्र बन जाए तो काफी हद तक समस्या का निदान हो सकता है।
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कई लोग हो चुके हैं घायल
छुट्टा पशुओं के हमले में कई लोग घायल हो चुके हैं। करीब तीन साल पहले आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय चकदही की शिक्षिका रतन बाला सांड़ के हमले में घायल हो गई थीं, और कई महीने तक उन्हें इलाज कराना पड़ा। इसी तरह बिधियानी के पास बाइक से जा रहे हैं प्रभाकर भी पशुओं के हमले का शिकार हो गए थे। उन्हें काफी चोटें आई थीं।
कोट,
शहर के मोहद्दीनपुर में पशु आश्रय केंद्र के लिए जमीन चिन्हित कर शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। प्रयास है कि इसकी मंजूरी मिल जाए। इस पशु आश्रय केंद्र के बन जाने से काफी हद तक समस्या दूर हो जाएगी। -अवधेश कुमार, ईओ, नगर पालिका परिषद, खलीलाबाद