संतकबीरनगर। होली पर गुझिया, मालपुआ और अन्य तले-भुने व्यंजनों का अधिक सेवन लोगों के पाचन तंत्र पर भारी पड़ रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों पेट दर्द, गैस, एसिडिटी और कब्ज के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
इस समस्या से परेशान होकर 60 से 70 की संख्या में प्रतिदिन मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सक इलाज के साथ ही दवा दे रहे हैं। ज्यादातर मरीज एसिडिटी और पेट में जलन की समस्या से परेशान हैं, जबकि कब्ज और दस्त के मरीज भी बड़ी संख्या में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. कुमार सिद्धार्थ ने बताया कि होली पर मैदा, बेसन और तेल से बने भारी भरकम व्यंजनों का अधिक सेवन होने से पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
गुझिया, मालपुआ, पूरी, समोसा जैसे तले-भुने और अधिक मीठे खाद्य पदार्थ पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं, जिससे बदहजमी, गैस और पेट दर्द की शिकायतें बढ़ जाती हैं। उन्होंने बताया कि होली के बाद अस्पताल में 15 से 20 ऐसे मरीज भी आए, जो डायबिटीज के मरीज हैं और ज्यादा मीठा खाने के कारण उनका ब्लड शुगर लेवल बढ़ गया। कई मरीजों ने बताया कि उन्होंने त्योहार के दौरान गुझिया और अन्य मीठे व्यंजन अधिक मात्रा में खा लिए, जिसके बाद उनकी शुगर अनियंत्रित हो गई।
चिकित्सक ने लोगों को सलाह दी है कि त्योहार के बाद कुछ दिनों तक हल्का और सुपाच्य भोजन ही करें। दाल-चावल, रोटी, सब्जी, दही और फल का सेवन करें तथा पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। तला-भुना, ज्यादा मसालेदार और मीठे खाद्य पदार्थों से कुछ समय तक परहेज करें। यदि किसी को तेज पेट दर्द, उल्टी, दस्त या बुखार जैसी गंभीर समस्या हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क कर उचित इलाज कराना चाहिए।
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होली के बाद बदलते मौसम के कारण इस समय मरीजों की संख्या ज्यादा है। होली के बाद सबसे अधिक पेट दर्द, सर्दी जुकाम, गले में दर्द और डायबिटिज के मरीज आ रहे हैं। जिनका इलाज किया जा रहा है। -डॉ. रमाशंकर, सीएमएस