संतकबीरनगर। खलीलाबाद शहर के मीट मंडी रोड स्थित ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान के मदरसे के मामले में एसडीएम कोर्ट ने ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। इस पर मदरसा प्रबंधक तौसीफ रजा ने डीएम कोर्ट में आदेश को चुनौती देकर स्टे के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। साथ ही अपील भी दाखिल की। डीएम कोर्ट ने मामले में सुनवाई के बाद प्रस्तुत स्थगन प्रार्थनापत्र निरस्त कर दिया। साथ ही पक्षकार को अपील पर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
प्रशासनिक कार्रवाई में मदरसा भवन सील होने के बाद नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र मगहर खलीलाबाद की तरफ से मदरसे के भवन का नक्शा न पास होने के वजह से तीन नवंबर को नोटिस दिया था, जिसके बाद प्रबंधतंत्र ने मामले में हाईकोर्ट की शरण ली।
हाईकोर्ट की डबल बेंच ने रिट खारिज करके सक्षम न्यायालय में आपत्ति दर्ज कराने का आदेश दिया। उसके बाद मामले की सुनवाई एसडीएम कोर्ट में चली। एसडीएम कोर्ट में सुनवाई के बाद प्रबंधतंत्र कोई वैध दस्तावेज नहीं प्रस्तुत कर सका। इसके बाद 13 जनवरी को 15 दिन के भीतर मदरसा ध्वस्तीकरण का नोटिस चस्पा किया गया।
इसके बाद एसडीएम कोर्ट के आदेश पर 22 जनवरी को डीएम कोर्ट में प्रबंधतंत्र ने अपील की। साथ ही स्थगन आदेश के लिए प्रार्थनापत्र भी प्रस्तुत किया। डीएम कोर्ट ने विवेचना के दौरान पाया कि 13 जनवरी को एसडीएम कोर्ट के आदेश को स्थगित करने का कोई औचित्य परिलक्षित नहीं होता है। इसके आधार पर तौसीफ रजा प्रबंधक व मैनेजर कुल्लियतुल वनातिर रजविया एजूकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी रजा नगर मीट मंडी रोड खलीलाबाद द्वारा दिनांक 22 जनवरी को प्रस्तुत स्थगन प्रार्थनापत्र को निस्तारित कर दिया। साथ ही पक्षकार को अपील पर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
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स्टे प्रार्थना पत्र हाईकोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर निस्तारित करने का दिया था आदेश
एसडीएम कोर्ट के 13 जनवरी के आदेश के खिलाफ प्रबंध तंत्र ने प्रयागराज हाईकोर्ट की शरण ली थी। प्रबंधतंत्र ने कोर्ट से 13 जनवरी के आदेश को विवादित बताते हुए आदेश रद्द करने की मांग की थी। जहां डबल बेंच में मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने पूर्व के आदेश एवं तथ्यात्मक स्थिति को देखते हुए कहा कि पहले ही एक्ट के तहत विवादित आदेश के खिलाफ स्टे एप्लीकेशन के साथ अपील दायर की है। इसलिए यदि अपीलीय अथॉरिटी इस आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करने की तारीख से चार सप्ताह के भीतर स्टे एप्लीकेशन पर योग्यता के आधार पर फैसला करती है तो पर्याप्त न्याय होगा। इसके बाद, संबंधित अपील पर भी बिना किसी अनावश्यक स्थगन के पार्टियों को जल्द से जल्द योग्यता के आधार पर फैसला किया जा सकता है। स्टे एप्लीकेशन के निपटारे तक पार्टियां कोर्ट के आदेश की तारीख के अनुसार विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखेंगी और याचिकाकर्ता को भी विवादित निर्माणों पर कोई और भी विकास कार्य करने से कोर्ट ने रोक लगा दिया था।