उंचहराकला गांव के स्वतंत्रता सेनानी के नाम से गेट बनाया गया है
सेमरियावां। ब्लाॅक के ग्राम पंचायत उंचहराकला के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हाफिज निजामुद्दीन ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। छह माह की कठोर सजा मिली। आज भी उनके नाम से गांव में गेट बना है। लेकिन उनके परिवार को प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के पोते हाफिज बिलाल अहमद नदवी ने बताया कि उसके दादा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हाफिज निजामुद्दीन प्राथमिक शिक्षा के बाद उच्चशिक्षा की तालीम लिए जिला सहारनपुर गए। इसी दौरान अंग्रेजी हुकूमत के विरूद्ध चलाई जा रही तहरीक रेशमी रूमाल से जुड़ गए। सहारनपुर से घर आने के बाद वे जगह-जगह सेमरियावां इलाके में अंग्रेजी शासन के विरूद्ध सभाएं कीं। इसी दरमियान सेमरियावां क्षेत्र के उसराशहीद गांव में एक वृहद रूप से कार्यक्रम किया।
इस कार्यक्रम में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी शामिल हुए । यहीं से क्रांतिकारी हाफिज निजामुद्दीन अंग्रेजी हुकूमत की निगाह में आ गए और अंग्रेजी सरकार ने 19 फरवरी 1940 को इस क्रांतिकारी को गिरफ्तार कर लिया और छह माह की कठोर सजा दी।
पहले बस्ती जेल में रखा, बाद में बनारस जेल में रहे। जेल से आने के बाद भी वह अंग्रेज शासन के विरूद्ध मुखर रहे और 15 फरवरी 1944 को इनका निधन उंचहराकला गांव में हो गया। संवाद