तमाम तरह की शिकायतों पर एसपी ने कराई गोपनीय जांच
सभी थानों पर तैनात 17 पुलिस कर्मियों को भेजा गया लाइन
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। पुलिस में थाना प्रभारियों के कारखास होने का रिवाज पुराना है। कारखास बनने वाले पुलिस कर्मी अपने मूल काम से भटक गए। लेनदेन कर थाना प्रभारियों से भी काम कराने की शिकायतें एसपी तक पहुंचने लगीं। एसपी ने इसकी गोपनीय जांच कराई तो मामला उजागर हुआ। एसपी ने चिह्नित कराकर सभी थानों पर कारखास बने 17 पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया। अब वे पुलिस लाइंस परिसर में परेड में शामिल होंगे और दौड़ लगाएंगे।
अमूनन थानों में एसओ के कामकाज में सहयोग करने के लिए कुछ पुलिस कर्मी कारखास हो जाते हैं। वे एसओ के इतने निकट में होते हैं कि उनकी हर तरह की समस्याओं के समाधान में सहभागी होती है। इससे इतर एसओ के कारखास होने का फायदा भी उठाते हैं। थानों में काम कराने का जिम्मा तक उठा लेते हैं। अक्सर बाहर से आना वाले व्यक्ति को कारखास को पहचाने में मशक्कत करनी पड़ती है। वजह साफ है कि कारखास वर्दी में नहीं होते हैं। वे सादे कपड़े में एसओ के आसपास मड़राते रहते हैं।
कई बार ऐसा भी होता है कि अधिकारी भी यदि औचक निरीक्षण में पहुंचते है तो उन्हें भी कारखास को पहचानने में दिक्कत होती है। एसपी सत्यजीत गुप्ता तक कारखासों की शिकायतें पहुंच रही थीं। एसपी ने थानेवार कारखासों को चिह्नित कराया। इसमें कोतवाली में तैनात मुख्य आरक्षी विजय कुमार सिंह, रविद्र निषाद, राधेश्याम गुप्ता, कांस्टेबल चालक संजय पांडेय का नाम शामिल हैं।
दुधारा थाने पर तैनात मुख्य आरक्षी मोतीलाल यादव, राजा राम गुप्ता, धनघटा थाने में तैनात मुख्य आरक्षी फखरूद्दीन, कांस्टेबल प्रवीण तिवारी, महुली थाने में तैनात मुख्य आरक्षी शैलेंद्र उपाध्याय, बृजनरायण यादव, मेंहदावल थाने में तैनात मुख्य आरक्षी अखिलेश पांडेय, कांस्टेबल रत्नेश सिंह, कांस्टबेल दीपक कुमार, बखिरा थाने में तैनात कांस्टेबल अब्दुल अलीम, कांस्टेबल सत्यम सिंह का नाम सामने आया। बेलहर कला थाने पर तैनात मुख्य आरक्षी धर्मनाथ यादव, हेड पुनीत पाठक का नाम शामिल है। एसपी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि थानों पर तैनात 17 कारखासों को लाइन में विशेष प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है।