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सीता स्वयंवर देख भाव-विभोर हुए दर्शन

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सीता स्वयंवर देख भाव-विभोर हुए दर्शन - फोटो : अमर उजाला
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मगहर (संतकबीरनगर)। जिला स्वच्छता समिति के बैनर तले मगहर महोत्सव के समापन पर शुक्रवार की रात  सियाराम जनकपुरी से अवधपुरी शीर्षक पर आधरित सीता स्वयंवर नाटक का मंचन किया गया। इस दौरान कलाकारों ने स्वच्छता के प्रति जागरूक किया।
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लखनऊ की सत्य समर्पण संस्था की ओर से ‘अवधपुरी से जनकपुरी तक’ शीर्षक पर हुए नाट्य मंचन में अयोध्या के राजा दशरथ के तीन पत्नियों में रानी कौशल्या से श्रीराम का जन्म होता है। कैकेयी से भरत और रानी सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न जन्म लेते हैं। राजा दशरथ ने राम और लक्ष्मण को शिक्षा-दीक्षा के लिए विश्वामित्र के गुरुकुल में भेज दिया। जनकपुर के राजा जनक ने  पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर रचते हैं। धनुष तोड़ने वाले के साथ विवाह की शर्त रखी जाती है। स्वंवर में देश विदेश के राजा-महाराजा पहुंचते हैं, लेकिन धनुष टस से मस नहीं हो पाता है। विश्वामित्र सहित श्रीराम पहुंचते हैं। और राम धनुषभंग कर देते हंै।
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