संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी द्वारा संचालित शास्त्री तृतीय वर्ष की परीक्षा हिन्दी संस्कृत महाविद्यालय गागरगाड़ शिवापार में शांति पूर्वक संपन्न हो गई।
प्राचार्य रुद्रेश्वर शर्मा ने कहा कि महाविद्यालय के विकास और परीक्षा को शांति पूर्वक संपन्न कराने में सेवा मुक्त हो चुके आचार्य राम चंदर चतुर्वेदी का महत्वपूर्ण योगदान है। रामचंदर चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षा देने के लिए न तो कोई उम्र होती और न ही कोई समय सीमा। प्रत्येक मानव का कर्म है कि वह ज्ञान का दीप हमेशा जलाता रहे और इस काम को वह मरते दम तक करते रहेंगे।