सेमरियावां। इस्लामिक कैलेंडर की माह शाबान की पंद्रहवीं की रात को शब-ए-बरात कहा जाता है। इस वर्ष 13 फरवरी की रात को शब-ए-बरात मनाया जाना है। बृहस्पतिवार को मगरिब की नमाज के बाद पूरी रात इबादत का सिलसिला शुरू होगा और सुबह तक चलता रहेगा। अगले दिन शुक्रवार को सुन्नत का रोजा रखा जाएगा। शब-ए-बरात की रात खुदा की इबादत, गुनाहों से निजात, माफी मांगने, बख्शीश और तोबा करने की रात है। इस रात खुदा की रहमत बरसती है। कब्रिस्तान की साफ-सफाई और मस्जिदों की सजावट शुरू कर दी गई है।
ऑल इंडिया उलेभा बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष शोएब नदवी ने बताया कि शब का अर्थ रात और बरात का अर्थ छुटकारा और माफी मिलना। शब-ए-बरात जहन्नुम से छुटकारा पाने और गुनाहों से माफी मांगने की रात है। बताया कि हजरत मोहम्मद साहब की बीवी हजरत आयशा फरमाती हैं कि हजरत मोहम्मद साहब कमरे में बिस्तर पर सोए हुए थे तो रात में मेरी आंख खुली तो देखा कि मोहम्मद साहब कमरे में नही हैं। बाहर निकल कर देखा कि मदीना की कब्रिस्तान जन्नतुलबकी में मोहम्मद साहब अपने उम्मत की मगफिरत के लिए दुआ कर रहे हैं।
हजरत मोहम्मद साहब आए तो रात में जागने की वजह पूछने पर बताया कि आज शब-ए-बरात है। यह रात गुनाहों से माफी मांगने, बख्शीश, जहन्नुम से छुटकारा वाली रात है। खुदा की रहमत वाली रात है। इस रात को दिन डूबने से लेकर सुबह होने तक खुदा आसमान-ए दुनिया पर पर अल्ल्लाह ताला हाजिर होकर बार-बार पुकार कर कहते हैं कि कोई है गुनाहों से माफी मांगने वाला, जहन्नुम से निजात, गुनाहों से तोबा, बख्शीश, जन्नत मांगने वाला। इस रात सबकी बख्शीश हो जाती है।
अल्ला माफ कर देता है गुनाह
ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड के प्रदेश महासचिव मौलाना फुजैल नदवी ने बताया कि इंसान का कितना भी बड़ा गुनाह क्यों न हो, अल्लाह इस रात तौबा करने से माफ कर देता है। मुसलमानों को शब-ए-बरात की रात खुदा के जिक्र, कलाम पाक की तिलावत और नमाज में गुजारनी चाहिए। इस रात तहज्जुद, नफिल नमाज और अगले दिन का रोजा खुदा को बहुत पसंद हैं।
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रात में इबादत करनी चाहिए
सेहुड़ा के अफजाल अहमद नदवी ने कहा कि मुसलमानों को शब-ए-बरात में अपने पूर्वजों और व मगफिरत मांगनी चाहिए। रात में जागकर एकांत जगह बैठकर खुदा की इबादत, कुरआन की तिलावत करें, नमाज पढ़ना चाहिए और अगले दिन रोजा रखना चाहिए। शब-ए-बरात को सादगी मनाएं और शोर शराबा से बचें।