सिद्धार्थनगर। किसानों के लिए सरकार की योजनाओं का लाभ पाने के लिए फार्मर रजिस्ट्री को अनिवार्य कर दिया है। मगर सर्वर का पेच, बेमेल नाम और आधार-खतौनी में नाम का अंतर आदि समस्याओं से किसानों की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। ऐसे में किसान न सिर्फ पीएम सम्मान निधि से वंचित हो सकते हैं बल्कि उपज बेचने और कृषि यंत्र की खरीद में उन्हें किसी तरह का अनुदान भी नहीं मिल पाएगा। 30 अप्रैल रजिस्ट्री की आखिरी तिथि है, ऐसे में किसानाें की धड़कन बढ़ गई है।
15 अप्रैल तक गांव में कैंप के जरिये कृषि, राजस्व और ग्राम पंचायत की टीम किसानों की रजिस्ट्री कराने में जुटीं हैं। 30 अप्रैल तक इसकी समय सीमा तय की गई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो छह से 14 अप्रैल के बीच 5422 किसानों की ही फार्मर रजिस्ट्री हो पाई है। वहीं, 45 हजार के करीब किसान अभी इससे वंचित हैं। फार्मर रजिस्ट्री के हकीकत जानने के लिए कुछ कैंप और जनसेवा केंद्र की पड़ताल की गई तो किसान समस्याओं से जूझते हुए नजर आए। कहीं सर्वर की परेशानी सामने आई तो कहीं आधार और खतौनी में नाम अंतर होने के कारण आवेदन अस्वीकार कर दिए गए।
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पड़ताल में दिखा यह हाल, किसान बेहाल
तुलसियापुर। बढ़नी ब्लाॅक में किसानों के फार्मर रजिस्ट्री के लिए पांच गांवों में कृषि व राजस्व विभाग की ओर से संयुक्त रूप से कैंप लगाकर लोगों की फार्मर रजिस्ट्री की गई। जिन लोगों का दस्तावेज सही था, ऐसे लोगों की तो फार्मर रजिस्ट्री हो गई। मगर, जिनका नाम मिसमैच है या जो गांव में नहीं है, उनकी रजिस्ट्री नहीं हो पाई है। बढ़नी ब्लाॅक के मड़नी, बसहिया, अर्री, दुधवनिया खुर्द और ढेबरुआ में बुधवार को कैंप लगा था। बढ़नी ब्लाॅक के एडीओ एजी रामसेवक ने बताया कि आधार कार्ड व खतौनी में जिनका नाम समान नहीं है, उनके लिए दिक्कत हो रही है। इनके पिता का नाम समान नहीं है, उनके लिए दिक्कत हो रही है। जो रोजी-रोटी के लिए बड़े शहरों में हैं, उनकी फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो रही है। एकाध जगहों पर नेटवर्क की थोड़ी-बहुत समस्या आ रही है। उन्होंने कहा कि कैंप में जो लोग बाहर हैं उनके परिजनों को बुलाकर उन्हें बताया जा रहा है कि वह जहां भी हैं, वहां जनसेवा केंद्र पर जाकर वहां फार्मर रजिस्ट्री करवा लें। इस दौरान उन्होंने बताया कि जितने लोगों का दस्तावेज सही है और वह मौके पर गांव में मौजूद हैं, ऐसे अधिकांश लोगों की फार्मर रजिस्ट्री हो गई है।
सर्वर डाउन, अंगूठा भी नहीं लगा
पकड़ी बाजार। जोगिया ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत कोइलीघाट में बुधवार को कृषि विभाग की ओर से कैंप लगाकर 14 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री की गई। इस दौरान कुछ लोगों का नाम खतौनी में, कुछ आधार में और कुछ के नाम मेल नहीं खा रहा है। कुछ किसान का नाम खतौनी में है पर रजिस्ट्री करते समय नाम डिस्पैच नहीं हो पा रहा। कुछ किसान ऐसे हैं, जिनकी मृत्यु हो गई है पर उनके परिवार के लोगों के नाम एक ही जगह है, ऐसे लोगों की रजिस्ट्री में समस्या आ रही है। इस संबंध में कृषि प्रविधिक सहायक जोगिया ब्लॉक अविनाश द्विवेदी ने बताया कि कैंप में 14 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री की गई है। रजिस्ट्री करते समय कुछ दिक्कतें आ रही हैं।
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33 किसान लौटे मायूस
धेंसा। नौगढ़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत अहिरौली में बुधवार को फार्मर रजिस्ट्रेशन कैंप का आयोजन किया गया। वहां पहुंचे 33 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पाई। इनमें आठ किसानों ने सहज जनसेवा केंद्र से एक सप्ताह पहले ही रजिस्ट्रेशन कराया है। तीन किसानों की मौत हो चुकी है पर उनका वरासत संबंधी कार्य पूरा नहीं हुआ है। कुछ किसान गांव में मौजूद नहीं थे, दो तीन लोगों का खतौनी में नाम सही न होने से रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ।कृषि विभाग इंचार्ज सुरेंद्र कुमार ने बताया कि किसान बलिराम यादव, भागीरथी एवं राजेश चंद सहित 10 किसानों का फार्मर रजिस्ट्रेशन किया गया।
खतौनी के मेन कॉलम में नाम न होने से हो रही परेशानी
घोसियारी। फार्मर रजिस्ट्री कर रहे किसानों का नाम खतौनी के आदेश में है, लेकिन कॉलम में नाम न होने से फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। इसके साथ ही कुछ किसानों की खतौनी और आधार कार्ड में नाम अलग-अलग आ रहा है। इसी के साथ कुछ किसान रोजगार के सिलसिले में बाहर हैं और सर्वर न होने से ऐसी समस्या बन रही है। किसान जा तो रहे हैं लेकिन उनकी रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। सहज जन सेवा केंद्र संचालक सत्यराम उपाध्याय ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री नहीं होने से पीएम किसान सम्मन निधि के साथ ही खाद बीज की खरीदारी के साथ धान-गेहूं की बिक्री के केंद्रों पर नहीं हो पाएगी।
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लेखपालों ने किया ऑनलाइन कार्य का बहिष्कार
इटवा। लेखपाल संघ के तहसील अध्यक्ष अमरदीप चौधरी की अगुवाई में बुधवार को तहसील के सभी लेखपाल ऑनलाइन कार्यों के बहिष्कार पर रहे। इनमें फार्मर रजिस्ट्री भी शामिल हैं। इस संबंध में तहसील अध्यक्ष अमरदीप चौधरी ने बताया कि पूर्व में दिए ज्ञापन पर जिम्मेदार अधिकारियों ने अभी तक कोई विचार नहीं किया गया है। इसके चलते मजबूरी में हम लेखपालों को यह निर्णय लेना पड़ा है।
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बोले किसान
हमारा नाम खतौनी में है। फार्मर रजिस्ट्री करने के बाद बायोमेट्रिक करते समय फिंगर नहीं लग रहा है, जिससे फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है।
सोहबाती, किसान कोइलीघाट।
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हमारा नाम खतौनी में कुछ और है आधार में दूसरा है। नाम मैच न होने से मेरी फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। हम सरकारी लाभ लेने से वंचित न हो जाएं, इसका डर है।
बृजलाल, किसान कोइली घाट
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जिले में हैं चार लाख किसान
कृषि विभाग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक जिले में कुल 4,04,252 हैं। इसमें पांच अप्रैल तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि वाले 2,21,442 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है जबकि 52,425 किसान बाकी थी। इसके अलावा नॉन पीएम किसान सम्मान निधि वाले किसान 1,30,385 हैं। इसमें 43,275 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री हो चुकी थी जबकि 87,110 किसान की फार्मर रजिस्ट्री नहीं बनी थी। यह आदेश आने के पहले पांच अप्रैल तक आंकड़ा था। विभाग के मुताबिक 6 से 14 अप्रैल तक चले अभियान में 5429 किसानों की रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी की गई है। इसमें बांसी में 1345, इटवा में 984, शोहरतगढ़ में 832, नौगढ़ में 1026 और डुमरियागंज में 1234 किसान शामिल हैं।
किसानों की प्रोफाइल है फार्मर रजिस्ट्री
कृषि विभाग से जुड़े लोगों के मुताबिक फार्मर रजिस्ट्री एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां हर किसान का यूनिक प्रोफाइल तैयार की जाती है। इसमें किसान का नाम, आधार, बैंक खाता, भूमि विवरण, फसल की जानकारी आदि दर्ज होता है। इसे एक तरह से किसानों की डिजिटल पहचान कहा जा सकता है।
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क्या-क्या जानकारी होती है शामिल
किसान का नाम, पता और आधार नंबर
जमीन का रिकॉर्ड (खतौनी/खसरा)
फसल का प्रकार और क्षेत्रफल
बैंक खाता विवरण
मोबाइल नंबर
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यह आ रही है परेशानी
नगर के एक जनसेवा केंद्र पर फार्मर रजिस्ट्री के बारे में जानकारी ली गई तो जनसेवा केंद्र संचालक ने बताया कि पहले तो पोर्टल सही से नहीं चल रहा है। दूसरे किसानों के मोबाइल और आधार लिंक नहीं है। इसके अलावा सबसे बड़ी समस्या खतौनी में आ रही है। आधार में कुछ और है जबकि खतौनी में टाइटिल ही नहीं है। ऐसे में जैसे ही आवेदन किया जा रहा है, उसे निरस्त कर दिया रहा है। एक अक्षर में अंतर से लटक जा रहा है। यह एक दो नहीं बल्कि अधिकांश किसानों के साथ ऐसा हो रहा है। कमोबेश यही हाल देहात के केंद्रों पर देखने को मिला। जोगिया क्षेत्र के किसान रामहित यादव ने बताया कि पीएम के किसान योजना का लाभ पा रहे थे। बताया गया फार्मर रजिस्ट्री जरूरी है, उसके लिए कई दिन प्रयास किए, लेकिन अभी तक नहीं बन सका। इसके अलावा शमसुल ने कहा कि मेरे आधार में खां है और खतौनी में केवल नाम है, इसलिए नहीं बन पाया। ऐसा अनेक किसानों का दर्द है।
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कैसे बनती है फार्मर रजिस्ट्री
ऑनलाइन पोर्टल या सीएससी सेंटर के माध्यम से
आधार और जमीन के दस्तावेज जरूरी
मोबाइल नंबर लिंक होना चाहिए
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बोले जिम्मेदार
गांव- गांव कैंप लगाकर वंचित किसानों की फार्मर रजिस्ट्री कृषि विभाग, राजस्व की टीम की ओर से की जा रही है। जिन किसानों के खतौनी में नाम में अंतर है, वे सही करवा लें। 30 अप्रैल तक अभी समय सीमा है। इस बीच सभी किसान फार्मर रजिस्ट्री जरूर करवा लें, नहीं तो योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा।
- राजेश कुमार, उप कृषि निदेशक, सिद्धार्थनगर