एसपी विजलेंस घनश्याम चौरसिया ने बताया कि मदरसा रिजविया अहले सुन्नत कड़जी रुरस्तमपुर के बर्खाश्त शिक्षक बदरुद्दीन की शिकायत पर पहले इंसपेक्टर अशोक सिंह से जांच कराई थी।
उसके बाद ट्रैप टीम गठित किया था। बुधवार को ट्रैप टीम ने कलेक्ट्रेट के पास से मदरसा प्रबंधक के भतीजे इरशाद अहमद को बर्खाश्त शिक्षक से घूस लेते हुए पकड़ा।
आरोपी के कब्जे से 50000 रुपये और साढे नौ लाख का चेक बरामद किया था। आरोपी के खिलाफ कोतवाली खलीलाबाद में भ्रष्ट्राचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कराते हुए गुरुवार को गोरखपुर कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने आरोपी को जेल भेज दिया।
24 फरवरी को आरोपी रिमांड पर फिर कोर्ट में पेश किया जाएगा। मामले की विवेचना विजलेंस के इंसपेक्टर विनय सिंह को दी गई है। आगे बताया कि अभी तक जांच पड़ताल में यह बात सामने आई है कि मदरसा प्रबंधकीय कमेटी ने तीन नवंबर 2012 को मदरसे में नियुक्त सभी 14 शिक्षकों को बर्खाश्त कर दिया था।
बावजूद उसके बर्खाश्त शिक्षक मदरसे में अध्यापन कार्य करते रहे। मदरसे के प्रबंधक ने बर्खाश्त पांच शिक्षक नुरुल भावदीन, अब्दुल रहमान, फैज मोहम्मद, यार मोहम्मद और नुरुल हसन को बहाल कर दिया था।
अप्रैल 2012 से लेकर दिसंबर 2014 तक का बहाल पांचों शिक्षकों का वेतन प्रबंधक का भतीजा एसबीआई के अपने दो अलग- अलग खातों में करीब 40 से 50 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिया था।
शिकायतकर्ता बर्खाश्त शिक्षक बदरुद्दीन से भी बहाली कराते हुए वेतन दिलाने के नाम पर आरोपी इरशाद अहमद ने दस लाख की रकम मांगी थी और उसी चक्कर में पकड़ा गया।
विजलेंस एसपी ने आगे बताया कि विवेचक को निर्देश दिया गया है कि 24 फरवरी से पूर्व साक्ष्य संकलन करके विवेचना की प्रगति रिपोर्ट से अवगत कराएं।
इंसेट
घूसखोरी में मदरसा प्रबंधक के भतीजे के पकड़े जाने का कोई यह पहला वाकया नहीं है। इसके पूर्व एंटीकरप्सन और सीबीआई की टीम भी जिले में कुछ घूसखोर को पकड़ कर जेल भेज चुकी है।
रिश्वत लेने की चक्कर में हुई कार्रवाई की जद में पूर्व में एक दरोगा, बीएसए कार्यालय का एक बाबू,डाक विभाग का एक पूर्व अधिकारी और पीएनबी शाखा धनघटा का एक पूर्व शाखा प्रबंधक भी आ चुके है।
बावजूद इसके घूस लेने से घूसखोर बाज नहीं आ रहे है।