श्रावस्ती जिले के भिनगा निवासी बदरुद्दीन पुत्र बुद्धु बख्श का आरोप था कि वह धनघटा क्षेत्र के कड़जी रुस्तमपुर में स्थित मदरसा रिजविया अहले सुन्नत में सहायक अध्यापक पद पर तैनात है।
वर्ष 2012 में प्रबंधकीय कमेटी ने 14 शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया था। इसमें वह भी शामिल है। आरोप था कि मदरसे के प्रबंधक मुस्लिम खां बीमार चल रहे है।
व्यवहारिक तौर पर मदरसे का काम प्रबंधक के भतीजे इरशाद अहमद पुत्र रईस अहमद निवासी मदारपुर बेईली जिला बस्ती देख रहे है। आरोप था कि प्रबंधक के भतीजे ने उन्हें सेवा में बहाल कराते हुए वेतन भुगतान कराने के नाम पर दस लाख रुपये घूस मांगी।
वह इसकी शिकायत आठ फरवरी को उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान गोरखपुर के एसपी से शिकायती पत्र देकर किए थे। बुधवार को वह घूस में मांगी गई रकम प्रबंधक के भतीजे को देने की बात किए थे।
कलेक्ट्रेट के पास जैसे ही प्रबंधक के भतीजे उनसे घूस की रकम ले रहे थे,वैसे ही पहले से सतर्क विजलेंस की टीम ने इरशाद अहमद को पकड़ लिया।
गोरखपुर विजिलेंस टीम के एसपी घनश्याम चौरसिया ने बताया कि मदरसे के बर्खाश्त शिक्षक बदरुद्दीन की शिकायत पर पहले प्रारंभिक जांच कराई तो प्रथम दृष्टया शिकायत सही मिली।
उसके बाद विजलेंस के इंसपेक्टर आरडी चौहान के नेतृत्व में गठित टीम ने विकास भवन और कलेक्ट्रेट के बीच में बर्खास्त शिक्षक से घूस में 50000 रुपये और एसबीआई का एकाउंटपेई साढे़ नौ लाख का चेक लेते हुए प्रबंधक के भतीजे इरशाद अहमद को गिरफ्तार किया।
आरोपी की बिना नंबर की कार भी कब्जे में लिया गया। बरामद रुपये में 1000 के 26 नोट और 500 के 48 नोट शामिल है। जांच में यह बात सामने आई कि प्रबंधक के भतीजे बर्खाश्त कुछ और शिक्षकों से भी बहाली के नाम पर घूस ले चुके है।
आगे बताया कि विजिलेंस इंसपेक्टर आर डी चौहान की तरफ से तहरीर देकर कोतवाली खलीलाबाद में आरोपी इरशाद अहमद के खिलाफ भ्रष्ट्राचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज करा दिया गया। आरोपी को 24 घंटे के अंदर एंटी करप्सन कोर्ट गोरखपुर में पेश किया जाएगा। मामले की विवेचना विजलेंस टीम करेंगी।