हीरालाल रामनिवास स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय में बौद्धिक संपदा अधिकार विषय पर आयोजित संगोष्ठी को
संतकबीरनगर। हीरालाल रामनिवास पीजी कॉलेज खलीलाबाद में बुधवार को बौद्धिक संपदा अधिकार विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई। इसमें बतौर मुख्य अतिथि इंडियन पेटेंट हॉऊस नई दिल्ली के सहायक नियंत्रक रवि प्रकाश पांडेय ने कहा कि बौद्धिक संपदा भी भौतिक संपदा की तरह ही एक महत्वपूर्ण संपत्ति है। भारत में बौद्धिक संपदा के प्रति जागरूकता अभी कम है।
उन्होंने बताया कि बौद्धिक संपदा अधिकार के पेटेंट के मामले में भारत अभी छठवें स्थान पर है। जागरूकता से हम बौद्धिक संपदा के पेटेंट को बढ़ा सकते हैं। 21वीं शताब्दी ज्ञान की शताब्दी है, इसमें वही राष्ट्र सर्वोच्च होगा, जिसके पास सबसे अधिक बौद्धिक संपदा होगी। उन्होंने कहा कि इस अधिकार के तहत कोई भी व्यक्ति अपनी बौद्धिक संपदा को पेटेंट करा सकता है। भारत सरकार बौद्धिक अधिकार के संरक्षण के लिए 2016 में राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति को पास किया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. ब्रजेश त्रिपाठी ने किया। उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी को बौद्धिक संपदा अधिकार के बारे में जागरूक होने की आवश्यकता है। भारत विश्व की सर्वाधिक युवा आबादी वाला राष्ट्र है, जिसमें असीम प्रतिभाएं विद्यमान हैं। जिनको इस अधिकार से लाभ मिलेगा। कार्यक्रम का संचालन प्रो. गणेश श्रीवास्तव एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. विजय कृष्ण ओझा ने किया।
कार्यक्रम में प्रोफेसर विजय राय, प्रताप विजय कुमार, डॉ. अमर सिंह गौतम, शशिकांत राव, डॉ. विजय कुमार मिश्र, डॉ. मनोज मिश्रा, डॉ. संध्या राय, फखरे आलम, मनोज वर्मा, डॉ. माला सिंह, डॉ. अनुपम पति त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।